
देहरादून। बढ़ता मोटापा बच्चों के स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों में कमी ने यह चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे में उत्तराखंड से आई खबर उम्मीद जगाने वाली है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-छह के अनुसार राज्य ने अपने प्रयासों से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में ओवरवेट (मोटापे) की दर को 4.1 प्रतिशत से घटाकर मात्र 0.7 प्रतिशत पर ला दिया है।
इस उपलब्धि से बच्चों में मधुमेह, हृदय रोग व अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों का खतरा कम होगा। इससे बच्चों की शारीरिक और मानसिक वृद्धि बेहतर होगी। इस सफलता से उत्तराखंड स्वस्थ मानव संसाधन व बेहतर जनस्वास्थ्य सूचकांकों वाले राज्य के रूप में अपनी पहचान बना सकेगा। खास यह है कि राज्य ने बच्चों के बढ़ते वजन पर नियंत्रण के साथ ही कुपोषण पर भी लगाम लगाने में भी कामयाबी हासिल की है।
कमजोर बच्चों की संख्या में भी बड़ी कमीराष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-छह के अनुसार बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के अनुपात में कम लंबाई) 27 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत रह गई है। वेस्टिंग (लंबाई के अनुपात में कम वजन) 13.2 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत और गंभीर वेस्टिंग 4.7 प्रतिशत से घटकर दो प्रतिशत हो गई है।
कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत भी 21 से घटकर 19.6 प्रतिशत रह गया है। बच्चों में ओवरवेट की दर 4.1 प्रतिशत से घटकर मात्र 0.7 प्रतिशत रहना संतुलित पोषण की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधारगर्भवती महिलाओं के प्रथम तिमाही में पंजीकरण की दर 68.8 प्रतिशत से बढ़कर 80.6 प्रतिशत हो गई है। प्रसव पूर्व जांच कवरेज 91.8 प्रतिशत से बढ़कर 98.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
संस्थागत प्रसव 83.2 प्रतिशत से बढ़कर 88.9 प्रतिशत तथा प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में प्रसव 90.3 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं। प्रसव के दो दिनों के भीतर माताओं को प्रसवोत्तर देखभाल मिलने की दर भी बढ़कर 86.5 प्रतिशत हो गई है।
नवजात और बच्चों की बेहतर देखभालजन्म के दो दिनों के भीतर नवजात शिशुओं को मिलने वाली प्रसवोत्तर देखभाल 78.9 प्रतिशत से बढ़कर 86.7 प्रतिशत हो गई है।
बच्चों में विटामिन-ए अनुपूरण 53.7 प्रतिशत से बढ़कर 59.9 प्रतिशत तथा 6 से 23 माह आयु वर्ग के बच्चों में पर्याप्त आहार प्राप्त करने की दर 12.2 प्रतिशत से बढ़कर 19.2 प्रतिशत दर्ज की गई है।
93 प्रतिशत बच्चों को रोटावायरस वैक्सीन की तीनों खुराकराज्य में पूर्ण टीकाकरण प्राप्त करने वाले बच्चों का प्रतिशत 81.1 से बढ़कर 86 प्रतिशत हो गया है।
खसरा की दूसरी खुराक लेने वाले बच्चों का प्रतिशत 71.3 से बढ़कर 83.2 प्रतिशत और रोटावायरस वैक्सीन की तीनों खुराक लेने वाले बच्चों का प्रतिशत 32.3 से बढ़कर 92.8 प्रतिशत पहुंच गया है। यह टीकाकरण कार्यक्रमों की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।
ब्लड प्रेशर नियंत्रण में सफलतागैर-संचारी रोगों के क्षेत्र में भी राज्य ने सकारात्मक परिणाम दर्ज किए हैं। उच्च रक्तचाप से प्रभावित महिलाओं का प्रतिशत 22.9 से घटकर 14.5 तथा पुरुषों में 31.8 से घटकर 18.3 प्रतिशत हो गया है। नियमित स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियानों को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-छह के सकारात्मक परिणाम राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पित प्रयासों का प्रतिफल हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
