उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की “सनातन धर्म संरक्षक” की मजबूत छवि ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी का प्रमुख पोस्टर ब्वॉय बना दिया है. उनके नेतृत्व में लिए गए कई कठोर और चर्चित फैसलों ने न केवल राज्य में उनकी पकड़ मजबूत की है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें पार्टी का भरोसेमंद चेहरा बना दिया है.
धामी सरकार द्वारा लागू की गई समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. इसके साथ ही मतांतरण के खिलाफ सख्त कानून, “ऑपरेशन कालेनेमि” जैसे अभियान और सरकारी भूमि पर धार्मिक प्रतीकों के आधार पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई ने उनकी छवि को एक निर्णायक और सख्त प्रशासक के रूप में स्थापित किया है. इन फैसलों ने उन्हें खास तौर पर हिंदुत्व समर्थक वर्ग में लोकप्रिय बनाया है.
पार्टी ने सीएम धामी को स्टार प्रचारक की भूमिका में आगे बढ़ायाभाजपा ने इसी लोकप्रियता और मजबूत छवि को देखते हुए उन्हें विभिन्न राज्यों में स्टार प्रचारक की भूमिका में आगे बढ़ाया है. हिंदी भाषी राज्यों के साथ-साथ गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी उनकी मांग तेजी से बढ़ी है. हाल ही में बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में उन्होंने कई चुनावी सभाओं और रोड शो के जरिए पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की. बंगाल में उनके रोड शो और जनसभाओं में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि उनकी अपील क्षेत्रीय सीमाओं से परे जा रही है.
राष्ट्रीय स्तर पर दिख रहा सीएम धामी के फैसलों का असरउत्तराखंड में लागू यूसीसी मॉडल की चर्चा अब अन्य राज्यों में भी होने लगी है. गुजरात में इस दिशा में पहल शुरू हो चुकी है, जबकि असम में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है. इससे साफ है कि धामी सरकार के फैसलों का असर अब राष्ट्रीय राजनीति पर भी दिखाई देने लगा है.
प्रदेश भाजपा संगठन भी आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पूरी तरह सक्रिय है. भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य तय किया गया. इस “हैटट्रिक” के संकल्प को पूरा करने में धामी सरकार के सुशासन, विकास कार्यों और निर्णायक नीतियों को मुख्य आधार माना जा रहा है.
सीएम धामी की कार्यशैली उन्हें बनाती है अलगराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धामी की साफ-सुथरी छवि, तेज निर्णय लेने की क्षमता और आक्रामक चुनावी शैली उन्हें भाजपा के अन्य नेताओं से अलग पहचान देती है. यही कारण है कि पार्टी उन्हें लगातार बड़े चुनावी राज्यों में प्रचार के लिए आगे कर रही है. कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब केवल उत्तराखंड तक सीमित नेता नहीं रह गए हैं, बल्कि वे भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के ऐसे चेहरे बन चुके हैं, जिन पर पार्टी भविष्य की चुनावी रणनीतियों में भी बड़ा दांव खेल रही है.
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