Subscribe for notification

उत्तराखंड, उच्च हिमालय में बढ़ी ठंड की मार, गंगोत्री धाम क्षेत्र में जमने लगे जल स्रोत – पर्वतजन

उत्तराखंड में इन दिनों कड़ाके की ठंड अपने चरम पर है। खासकर उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले इलाकों में पारा शून्य से काफी नीचे पहुंच गया है, जिसके चलते प्राकृतिक जल स्रोत ठोस बर्फ में बदलने लगे हैं। पहाड़ ही नहीं, बल्कि मैदानी जिले भी शीतलहर की चपेट में हैं। गंगोत्री धाम क्षेत्र से सामने आई ताज़ा तस्वीरें दिखाती हैं कि यहां तापमान माइनस 10 डिग्री तक गिरने के बाद नदी-नाले और झरने जमने लगे हैं।
वन्यजीवों की निगरानी और अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए शीतकाल में गंगोत्री नेशनल पार्क प्रबंधन ने गोमुख, केदारताल ट्रैक और नेलांग घाटी क्षेत्र में करीब पचास ट्रैप कैमरे लगाए हैं। इस बीच, धाम क्षेत्र में पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है क्योंकि पाइपों में जमी बर्फ ने लोहे की लाइनों को फाड़ दिया है। स्थानीय लोगों और तैनात कर्मचारियों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि बीते दिनों गंगोत्री धाम में बारिश या बर्फबारी नहीं हुई, लेकिन न्यूनतम तापमान लगातार माइनस 1 से माइनस 10 डिग्री के बीच बना हुआ है। वहीं हर्षिल घाटी में दिन का अधिकतम तापमान चार से पांच डिग्री तक पहुंचता है, लेकिन शाम चार बजे के बाद यह तेजी से गिरकर रात में माइनस 8 डिग्री तक पहुंच जाता है। गंगोत्री नेशनल पार्क के कनखू बैरियर प्रभारी राजवीर रावत के अनुसार धाम क्षेत्र में तापमान लगातार शून्य से नीचे बना हुआ है।

इन परिस्थितियों के चलते गोमुख ट्रैक, नेलांग घाटी और गंगोत्री क्षेत्र में नदी-नाले और छोटे झरने जम गए हैं। पानी की कमी पूरी करने के लिए कर्मचारी और स्थानीय लोग जमी बर्फ को जलाकर पिघला रहे हैं। वहीं, पार्क क्षेत्र में 10 से 13 हजार फीट की ऊंचाई पर लगाए गए ट्रैप कैमरे शीतकाल में दुर्लभ वन्यजीवों की गतिविधियों और अवैध शिकार पर निगरानी रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनसे स्नो लेपर्ड, भरल, भूरा भालू और कस्तूरी मृग जैसे प्रजातियों के मूवमेंट और संख्या का भी आकलन किया जा रहा है।
गत मंगलवार को वन दारोगा राजवीर सिंह रावत की अगुवाई में टीम ने गोमुख ट्रैक पर गश्त की, दौरान उन्हें पांच से सात स्थानों पर जल स्रोत पूरी तरह जमे मिले। कई जगहों पर पतली जल धाराएं भी बर्फ में तब्दील हो गई हैं, जिससे ट्रैक पर फिसलन बढ़ गई है और दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। सबसे अधिक दिक्कतें गंगोत्री धाम में हो रही हैं, जहां जमी हुई पेयजल लाइनों ने सामान्य जलापूर्ति रोक दी है। अधिकारी बताते हैं कि बढ़ती ठंड के बीच ड्यूटी करना अब और भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

Sapna Rani

Recent Posts

अवैध निर्माणों पर एमडीडीए सख्त, ऋषिकेश–डोईवाला में ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई

अवैध निर्माण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं- एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास…

23 minutes ago