uttarakhand news : गूलरभोज–लालकुआं रेलवे ट्रैक पर बीते चार दिन पहले ट्रेन से टकराकर घायल हुआ हाथी आज जिदंगी की जंग हार गया। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद भी हाथी बच नहीं पाया। डॉक्टरों का कहना है कि उसका नर्व सिस्टम खराब होने के कारण शरीर के पिछले हिस्से में पैरालिसिस हो गया था। गूलरभोज में तराई के जंगलों में हाथी की मौत के बाद मानों सन्नाटा सा पसर गया हो। पशु- प्रमियों की बात करें तो हर कोई हाथी को देख नम आंखों वाला हो जा रहा है। दरअसल गूलरभोज–लालकुआं रेलवे ट्रैक पर निरीक्षण करती स्पेशल ट्रेन ओएमएस (ऑसिलेशन मॉनिटरिंग सिस्टम) से टकराकर हाथी घायल होकर पानी से भरे गढ्ढे में गिर पड़ा। 15 घंटे तक वह असहाय और निढाल पड़ा रहा। उसकी कराहें जंगल की हवा को चीरती रहीं।
चिकित्सकों की टीम ने दिन- रात रखा ध्यान
धरती को थर्रा देने वाले उसके पैर हिल भी नहीं पा रहे थे। आखिरकार जेसीबी मशीन की मदद से उसे बाहर निकाला गया। उसके पैरों में गहरी चोटें थीं। बायां दांत टूट चुका था। उसकी डबडबाई आंखों में दर्द और बेबसी घर कर गई थी। हाथी बिल्कुल भी खड़ा नहीं हो पा रहा था। हालांकि चिकित्सकों की टीम द्वारा हाथी का पूरा- पूरा ध्यान रखा गया था। चिकित्सक सुबह से लेकर शाम तक हाथी की सेवा करने में लगे रहे, लेकिन बावजूद इसके तभी भी हाथी बच नहीं पाया। हाथी घायल होने के बाद से दर्द से इतना तड़प रहा था कि वह कुछ खाने के लिए गर्दन तक नहीं मुड़ा रहा था। पूरे शरीर पर चोट होने की वजह कुछ खा नहीं पा रहा था। आखिरकार चिकित्सकों की कोशिश भी हार गई, और हाथी की मौत हो गई।
सिमरन बिंजोला
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