Uttarakhand।उत्तराखंड में जीएसटी विभाग की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (SIB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सितारगंज के एक बड़े औद्योगिक ग्रुप का करोड़ों का फर्जीवाड़ा उजागर किया है।
छापेमारी में 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की टैक्स चोरी सामने आई, जबकि मौके पर ही करीब 19.83 करोड़ रुपये जमा कराए गए।
सूत्रों के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क कई कंपनियों के जरिए चल रहा था, जिनका कुल कारोबार 500 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है।
8 घंटे चली कार्रवाई, करोड़ों का माल सीज
18 मार्च 2026 को विभाग की तीन टीमों ने एक साथ फैक्ट्री पर दबिश दी।
करीब आठ घंटे चली जांच में स्टॉक, खरीद-बिक्री, ट्रांजैक्शन और माल की आवाजाही से जुड़े अहम रिकॉर्ड कब्जे में लिए गए।
इस दौरान करीब 76 करोड़ रुपये का स्टॉक सीज कर दिया गया, जिस पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
कागजों में ‘जीरो’, असल में करोड़ों का कारोबार
जांच में बड़ा खुलासा हुआ कि कंपनी ने कागजों में अपना काम बंद दिखा रखा था।
डिमर्जर के बाद पुरानी कंपनी ने जेनसेट का कारोबार बंद दिखाया, लेकिन असल में यही काम दूसरी कंपनी के नाम से जारी रहा।
दिलचस्प बात यह है कि पुरानी कंपनी लगातार दूसरे राज्यों से माल खरीद रही थी, लेकिन GST पोर्टल पर ‘निल’ रिटर्न फाइल कर रही थी।
पिछले कुछ महीनों में ही 150 करोड़ से ज्यादा की खरीद दर्ज की गई।
बैंक खातों ने खोला पूरा खेल
कंपनी के बैंक खातों में भारी लेनदेन हो रहे थे, जो कागजी रिकॉर्ड से बिल्कुल अलग थे।
जांच में सामने आया कि दक्षिण भारत से माल लाकर अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किया जा रहा था।
सरकारी टेंडर में भी गड़बड़ी के संकेत
ज्यादातर सामान बिजली विभाग और ऊर्जा निगमों को सप्लाई किया गया था।
जांच के दौरान कीमतों में हेराफेरी और फर्जी बिलिंग के भी सबूत मिले हैं।
बताया जा रहा है कि पिछले सात महीनों से कंपनी ने टैक्स जमा ही नहीं किया था।
AI टेक्नोलॉजी से पकड़ा गया घोटाला
इस पूरे केस में विभाग ने एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया।
AI, डेटा एनालिसिस और RFID ट्रैकिंग की मदद से एक महीने तक निगरानी की गई, जिसके बाद यह बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया।
यहां तक कि अधिकारियों ने डमी कंपनी बनाकर भी जानकारी जुटाई।
ऐसे हुआ शक
डिमर्जर के बाद भी काम जारी रहना
बैंक खातों में असामान्य ट्रांजैक्शन
कागज और असल स्टॉक में अंतर
लंबी दूरी तक तेज सप्लाई
संदिग्ध बैकग्राउंड वाले डायरेक्टर
32 अफसरों की टीम ने मारी रेड
पूरी कार्रवाई जीएसटी आयुक्त सोनिका सिंह के नेतृत्व में की गई।
संयुक्त आयुक्त रोशन लाल और अपर आयुक्त राकेश वर्मा की निगरानी में 32 अधिकारियों की टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।
आगे और खुलासे संभव
फिलहाल जांच जारी है और जल्द ही कंपनी और उसके निदेशकों के नाम सामने आ सकते हैं।
विभाग को उम्मीद है कि आगे और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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