रिपोर्ट: कमल जगाती – नैनीताल। Uttarakhand Highcourt News उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बागेश्वर जिले में खड़िया (सोपस्टोन) के अनियंत्रित खनन को लेकर दायर जनहित याचिका पर अहम सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अब वैध खनन ऑपरेटरों को अनुमति देने से पहले उनके दावों का सत्यापन अनिवार्य होगा।
जिला खान अधिकारी को सौंपी जांच की जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने खनन पट्टा धारकों के दावों की जांच के लिए जिला खान अधिकारी नाजिया हसन को जिम्मेदारी दी है।
उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित इकाइयों के पास सभी वैध अनुमतियां हैं और मशीनें स्वीकृत खनन योजना के अनुरूप ही उपयोग हो रही हैं।
पर्यावरण जांच के लिए अलग अधिकारी नियुक्त होगा
पर्यावरणीय नियमों के पालन की जांच के लिए उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए गए हैं।
बोर्ड का सदस्य सचिव एक सप्ताह के भीतर क्षेत्रीय अधिकारी नामित करेगा, जो जिला खान अधिकारी के साथ मिलकर संयुक्त जांच करेगा।
वैध ऑपरेटरों को राहत के संकेत
न्यायालय ने संकेत दिए हैं कि जिन खनन संचालकों के पास वैध पट्टे और संचालन की अनुमति है तथा जिन पर कोई बड़ा जुर्माना नहीं है, उन्हें राहत मिल सकती है।
हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि बिना सत्यापन के किसी को भी काम शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पहले लग चुकी है खनन पर रोक
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 6 जनवरी 2025 को स्वतः संज्ञान लेते हुए बागेश्वर में सभी खनन कार्यों पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद 9 जनवरी 2025 को मशीनें जब्त करने के आदेश भी दिए गए थे।
स्टोन क्रशर संचालकों को मिली राहत
सुनवाई के दौरान स्टोन क्रशर मालिकों ने भी अपनी समस्या रखी।
इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल सोपस्टोन खनन से जुड़ा है और स्टोन क्रशर संचालन पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि 6 जनवरी 2025 का आदेश स्टोन क्रशरों पर लागू नहीं होगा।
दो सप्ताह में दावे, फिर रिपोर्ट कोर्ट में
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि खनन संचालक अपने दावे दो सप्ताह के भीतर जिला खान अधिकारी के समक्ष पेश करें।
इसके बाद अगले दो हफ्तों में जांच पूरी कर संयुक्त रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाएगी।
अगली सुनवाई 27 अप्रैल को
मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें जांच रिपोर्ट पेश की जाएगी।
कुल मिलाकर हाईकोर्ट के इस फैसले से जहां अवैध खनन पर सख्ती जारी रहेगी, वहीं वैध संचालकों को राहत मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
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