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‘ट्रिपल लेयर’ रणनीति से चुनावी मोड में उत्तराखंड बीजेपी, कांग्रेस की बढ़ाई टेंशन, जानें खासियत – myuttarakhandnews.com

देहरादून: हमेशा चुनावी मोड में रहने वाली बीजेपी ने कांग्रेस को चौंका दिया है. उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बीजेपी ने संगठन को बूथ से प्रदेश स्तर तक नए ढांचे में ढालते हुए ‘ट्रिपल लेयर सिस्टम’ लागू किया है. बीजेपी के इस ट्रेपल लेयर पर अब सियासी बहस भी तेज हो गई है.
ट्रिपल लेयर रणनीति से चुनावी मोड में बीजेपी: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 में भले ही अभी कुछ समय हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी तैयारियों को लेकर संगठनात्मक स्तर पर अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. पार्टी ने इस बार चुनावी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से लेकर उम्मीदवारों के चयन तक के लिए ‘ट्रिपल लेयर सिस्टम’ तैयार किया है.
चुनावी मोड में उत्तराखंड बीजेपीपहली बार विधानसभा सीट स्तर पर भी कोर ग्रुप: खास बात यह है कि पहली बार विधानसभा स्तर पर भी कोर ग्रुप गठित किए गए हैं, जिससे चुनावी तैयारियों और राजनीतिक फीडबैक को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कोशिश की जा रही है. बीजेपी का यह कदम केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है. पार्टी उन सीटों पर भी विशेष फोकस करना चाहती है, जहां पिछले चुनावों में उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली या जहां स्थानीय स्तर पर असंतोष की स्थिति रही है.
ये है ट्रिपल लेयर सिस्टम का तीसरा ग्रुप: बीजेपी द्वारा तैयार किए गए ट्रिपल लेयर सिस्टम में चुनाव से जुड़ा हर महत्वपूर्ण फैसला तीन अलग-अलग स्तरों से होकर गुजरेगा. सबसे नीचे विधानसभा स्तर का कोर ग्रुप होगा, जो क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर रखेगा. यह ग्रुप बूथ स्तर तक फीडबैक एकत्रित कर संगठन को उपलब्ध कराएगा.
ये है ट्रिपल लेयर सिस्टम का दूसरा ग्रुप: इसके ऊपर जिला स्तर का कोर ग्रुप काम करेगा. जिला कोर ग्रुप विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित करने, संगठनात्मक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की समीक्षा करने और चुनावी तैयारियों की निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगा.
ये है ट्रिपल लेयर सिस्टम का पहला और सबसे ऊपरी ग्रुप:सबसे ऊपर प्रदेश स्तर का कोर ग्रुप होगा, जो पूरे चुनावी अभियान की रणनीति तय करेगा. उम्मीदवार चयन, प्रचार अभियान, संगठनात्मक गतिविधियों और राजनीतिक फीडबैक जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अंतिम निर्णय इसी स्तर पर लिया जाएगा.
विधानसभा स्तर पर पहली बार बने कोर ग्रुप: बीजेपी की नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता विधानसभा स्तर पर कोर ग्रुप का गठन माना जा रहा है. पार्टी सूत्रों के अनुसार इन कोर ग्रुपों में संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के विधायक, जिलाध्यक्ष, क्षेत्र में रहने वाले प्रदेश पदाधिकारी, दायित्वधारी, जिला प्रभारी, सह प्रभारी तथा पंचायतों और निकायों के प्रमुखों को शामिल किया गया है. विधानसभा स्तर पर अलग कोर ग्रुप बनाने का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरणों और कार्यकर्ताओं के मूड को बेहतर तरीके से समझना है. यही कारण है कि पार्टी टिकट वितरण से पहले अधिक से अधिक स्तरों से फीडबैक जुटाने पर जोर दे रही है.
प्रत्याशी चयन में भी दिखेगा असर: उत्तराखंड की राजनीति में टिकट वितरण हमेशा से सबसे संवेदनशील विषयों में रहा है. कई बार टिकट आवंटन के बाद असंतोष और भीतरघात की घटनाएं भी सामने आती रही हैं. ऐसे में बीजेपी इस बार उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को अधिक व्यापक और बहुस्तरीय बनाने की तैयारी में है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कहना है कि-
पार्टी का हर निर्णय कार्यकर्ताओं की सहमति और फीडबैक के आधार पर लिया जाता है. विधानसभा चुनाव 2027 के लिए प्रत्याशियों का पैनल विधानसभा, जिला और प्रदेश स्तर की कोर कमेटियों से प्राप्त सुझावों और फीडबैक के आधार पर तैयार किया जाएगा. उनके अनुसार पहली बार विधानसभा स्तर पर बनाए गए कोर ग्रुप स्थानीय परिस्थितियों और कार्यकर्ताओं की राय को ऊपर तक पहुंचाने का काम करेंगे.-महेंद्र भट्ट, भाजपा अध्यक्ष, उत्तराखंड-
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो बीजेपी इस व्यवस्था के माध्यम से टिकट वितरण से पहले संभावित असंतोष को कम करने और स्थानीय नेतृत्व को निर्णय प्रक्रिया में शामिल दिखाने का प्रयास कर रही है. कांग्रेस बोली जनता की नाराजगी से डरकर आंखों में धूल झोंकने का काम: बीजेपी की इस नई चुनावी रणनीति पर कांग्रेस ने सवाल भी खड़े किए हैं. कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने इसे जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश बताया है. उनका कहना है कि-
बीजेपी को स्पष्ट करना चाहिए कि विधानसभा क्षेत्र स्तर की कोर कमेटियों में कौन लोग शामिल होंगे, क्योंकि अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में कई नेता टिकट की दौड़ में शामिल हैं. यदि टिकट के दावेदार ही कोर ग्रुप का हिस्सा होंगे, तो निष्पक्ष फीडबैक और निष्पक्ष प्रत्याशी चयन की गारंटी कैसे सुनिश्चित होगी.-गरिमा दसौनी, कांग्रेस प्रवक्ता-
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी कई विधानसभा क्षेत्रों में अंतर्कलह से जूझ रही है. कोर ग्रुप बनाकर उस वास्तविकता को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है. कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि चकराता, धारचूला और मंगलौर जैसी सीटों पर बीजेपी का प्रदर्शन ऐतिहासिक रूप से कमजोर रहा है और आगामी चुनावों में भी कई सीटों पर पार्टी को चुनौती का सामना करना पड़ेगा.
बीजेपी का पलटवार, हमें संगठन चलाना ना सिखाए कांग्रेस: कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है. भाजपा प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल का कहना है कि-प्रदेश, जिला और विधानसभा सीट स्तर पर टोली या समितियां बनाने की परंपरा पार्टी में पहले से रही है. इस बार उसे अधिक व्यवस्थित स्वरूप देते हुए कोर कमेटियों का नाम दिया गया है. भाजपा का संगठन कार्यकर्ता आधारित है और संगठनात्मक चर्चा की एक स्थापित कार्यपद्धति पर काम करता है.-तरुण बंसल, प्रदेश महामंत्री, भाजपा-
कांग्रेस हमें ना सिखाए संगठन चलाने का तरीका: तरुण बंसल के अनुसार कांग्रेस को बीजेपी को संगठन चलाने का तरीका बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भाजपा का संगठन लंबे समय से व्यवस्थित तरीके से कार्य कर रहा है और यही उसकी राजनीतिक सफलता का आधार भी है. बंसल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक ढंग से संचालित होने वाली कार्यकर्ता आधारित पार्टी है, जबकि कांग्रेस नेतृत्व केंद्रित राजनीति का उदाहरण बन चुकी है.
टिकट वितरण से पहले स्थानीय समीकरण साधने की कवायद: आपको बता दें कि बीजेपी का ट्रिपल लेयर सिस्टम केवल संगठनात्मक पुनर्गठन नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी रणनीति का शुरुआती संकेत है. पार्टी एक ओर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखना चाहती है, तो दूसरी ओर टिकट वितरण से पहले स्थानीय समीकरणों और कार्यकर्ताओं की राय को व्यवस्थित ढंग से जुटाने की तैयारी कर रही है.
उत्तराखंड में पिछले कुछ चुनावों के दौरान कई सीटों पर स्थानीय असंतोष, टिकट विवाद और गुटबाजी की चर्चाएं सामने आती रही हैं. ऐसे में विधानसभा सीट स्तर तक कोर ग्रुप बनाकर बीजेपी इन चुनौतियों को पहले ही चरण में नियंत्रित करने का प्रयास करती दिखाई दे रही है. हालांकि इस प्रयोग की वास्तविक सफलता चुनाव के दौरान ही सामने आएगी. फिलहाल इतना तय है कि बीजेपी ने 2027 की चुनावी लड़ाई के लिए संगठन को नए ढांचे में ढालना शुरू कर दिया है, जबकि कांग्रेस इसे महज राजनीतिक प्रबंधन और दिखावे की कवायद बता रही है. ऐसे में आने वाले महीनों में यह ट्रिपल लेयर सिस्टम उत्तराखंड की राजनीति में कितना प्रभावी साबित होता है, इस पर सभी की नजरें बनी रहेंगी.

Nandni sharma

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