Uttarakhand News : देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय में “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक सीमाएँ” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित – पर्वतजन

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय में “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक सीमाएँ” विषय पर एक महत्वपूर्ण विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक परिदृश्य, उभरती संभावनाओं तथा शिक्षा क्षेत्र में इसके प्रभावी उपयोग के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अमेरिका के बोस्टन स्थित मेट्रोपॉलिटन कॉलेज, बोस्टन विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर विजय कनाबर ने अपने अनुभव साझा करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) अजय कुमार द्वारा मुख्य अतिथि के स्वागत के साथ हुआ। अपने स्वागत संबोधन में उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, उत्कृष्ट शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, अनुसंधान गतिविधियों और विभिन्न परियोजनाओं में प्राप्त अनुदानों की जानकारी दी।

उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से लगातार आधुनिक तकनीकों को शिक्षा प्रणाली में शामिल कर रहा है।
कुलपति ने अपने संबोधन में कहा कि आज का समय डिजिटल क्रांति का दौर है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक ऐसी तकनीक के रूप में उभर रही है जो शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और प्रशासन सहित लगभग हर क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन ला रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे शिक्षकों और विद्यार्थियों को नई तकनीकों से परिचित कराते हुए उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाएं।
मुख्य वक्ता विजय कनाबर ने अपने व्याख्यान में बताया कि वर्तमान समय में दुनिया भर के विश्वविद्यालय और शोध संस्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, सहभागितापूर्ण और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल तकनीकी विषय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है।
एआई आधारित उपकरणों और डिजिटल मंचों के माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों की सीखने की गति, उनकी रुचियों और आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्य सामग्री तैयार कर सकते हैं, जिससे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी बन जाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि एआई की सहायता से स्मार्ट कक्षाओं, आभासी प्रयोगशालाओं, डिजिटल शिक्षण मंचों और स्वचालित मूल्यांकन प्रणाली का विकास संभव है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है।
उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने समझाया कि किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके जटिल विषयों को भी सरल और रोचक तरीके से विद्यार्थियों तक पहुँचाया जा सकता है।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में एआई आधारित तकनीकें शिक्षा जगत में बड़े बदलाव का कारण बनेंगी। इसलिए शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे इन नई तकनीकों को समझें और स्वयं को इनके अनुरूप ढालें।
उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग अनुसंधान, आँकड़ों के विश्लेषण, सामग्री निर्माण और शैक्षणिक प्रशासन से जुड़े कार्यों को अधिक सरल और प्रभावी बनाने में भी किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित शिक्षकों और विभागाध्यक्षों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न पहलुओं को लेकर कई प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने विस्तार से उत्तर दिया। इस संवादात्मक सत्र ने कार्यक्रम को और अधिक ज्ञानवर्धक और रोचक बना दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. आर. के. त्रिपाठी तथा डॉ. ऋतिका मेहरा सहित विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष और बड़ी संख्या में शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने इस व्याख्यान को अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया तथा भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के साथ संवाद से शिक्षकों और विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण प्राप्त होता है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
इस प्रकार “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक सीमाएँ” विषय पर आयोजित यह विशेषज्ञ व्याख्यान विश्वविद्यालय के शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ तथा सभी प्रतिभागियों को इससे नई जानकारी और व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ।

Sapna Rani

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