रिपोर्ट – गिरीश चंदोला
थराली (चमोली)। उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली ब्लॉक के सुनला क्षेत्र में संचालित अभ्युदय स्टोन क्रेशर एक बार फिर विवादों में आ गया है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि क्रेशर प्लांट में पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे आसपास के इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
धूल नियंत्रण के नियमों की हो रही अनदेखी
ग्रामीणों के अनुसार, क्रेशर प्लांट में आईबीएम (IBM) पिसाई और मिश्रण के दौरान पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है।
जबकि National Green Tribunal (NGT) के दिशा-निर्देशों के तहत धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव अनिवार्य है। इसके बावजूद खुलेआम नियमों की अनदेखी की जा रही है।
बस्ती और राहगीरों पर पड़ रहा असर
क्रेशर के पास ही आबादी होने के कारण उड़ती धूल सीधे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही है।
वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित इस प्लांट से गुजरने वाले राहगीरों को भी धूल के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना और स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं।
पहले भी हो चुका है बड़ा हादसा
स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी नियमों की अनदेखी के चलते यहां एक गंभीर सड़क हादसा हो चुका है, जिसमें एक युवक की मौत हो गई थी।
उस समय भी प्रशासन से कार्रवाई की मांग उठी थी, लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि खनन विभाग की जानकारी में होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं और लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
क्या बोला प्रशासन?
इस मामले में जिला खान अधिकारी अंकित चंद्र ने कहा कि यदि बिना पानी के छिड़काव के पिसाई की जा रही है, तो संबंधित स्टोन क्रेशर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि सभी क्रेशर संचालकों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि पिसाई के दौरान पानी का छिड़काव अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो और धूल रिहायशी क्षेत्रों तक न पहुंचे।
