
देहरादून, । उत्तराखंड की भौगोलिक, सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के तकनीकी समाधान तलाशने के उद्देश्य से उत्तराखंड इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस हैकाथॉन-2026 का शुभारंभ किया गया। ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने किया। 90 दिनों तक चलने वाली इस पहल में युवाओं की तकनीकी प्रतिभा और नवाचारपूर्ण विचारों को राज्य की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।कार्यक्रम में करीब 500 छात्र-छात्राओं, शिक्षाविदों, शिक्षकों, तकनीकी विशेषज्ञों और युवा इनोवेटर्स ने प्रतिभाग किया। हैकाथॉन के माध्यम से आपदा प्रबंधन, यातायात एवं भीड़ नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन और सुशासन से जुड़ी चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान विकसित किए जाएंगे।तकनीक को जनसमस्याओं के समाधान का माध्यम बनाएंकार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में राज्य की विशिष्ट चुनौतियों के समाधान विकसित करने की पर्याप्त क्षमता है। उन्होंने युवाओं से तकनीक को केवल प्रयोग और नवाचार तक सीमित न रखते हुए इसे आम नागरिकों की वास्तविक समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बनाने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिटिक्स, जीआईएस और ड्रोन तकनीक का उपयोग शासन और जनसेवा को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि विकसित होने वाले समाधान व्यावहारिक, जिम्मेदार और प्रयोगशाला से निकलकर धरातल पर लागू किए जा सकने योग्य होने चाहिए।प्रोटोटाइप से पायलट प्रोजेक्ट तक मिलेगा अवसरहैकाथॉन में प्रतिभागी सबसे पहले समस्या की पहचान कर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद प्रोटोटाइप निर्माण, विशेषज्ञों और मेंटर्स से मार्गदर्शन तथा समाधान को बेहतर बनाने के विभिन्न चरणों से गुजरेंगे। चयनित नवाचारों को पायलट प्रोजेक्ट, इन्क्यूबेशन और इंडस्ट्री लिंकेज की दिशा में आगे बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा।हैकाथॉन के तहत एआई आधारित सरकारी नॉलेज रिपॉजिटरी, सरकारी सूचनाओं को आसानी से खोजने और उपयोग करने वाली प्रणालियां, डीपीआर एवं आरएफपी तैयार करने में एआई का इस्तेमाल, डेटा गवर्नेंस, एआई आधारित जीआईएस और पर्यावरणीय विश्लेषण जैसे विषयों पर भी समाधान विकसित किए जाएंगे। आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचे के आकलन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए ड्रोन आधारित एरियल मॉनिटरिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।पर्यटन और तीर्थयात्रा से जुड़ी चुनौतियों पर भी फोकसउत्तराखंड में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की बड़ी मौसमी आवाजाही को देखते हुए यातायात दबाव का पूर्वानुमान लगाने, पर्यावरणीय दबाव की निगरानी करने, आपदा संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने वाले तकनीकी समाधान तलाशे जाएंगे। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान बनाने के उपाय भी हैकाथॉन के प्रमुख विषयों में शामिल रहेंगे।जिम्मेदार और नागरिक केंद्रित नवाचार को प्राथमिकताआयोजकों के अनुसार हैकाथॉन में नागरिक केंद्रित और जिम्मेदार नवाचार को प्राथमिकता दी जाएगी। विशेष रूप से शासन, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तकनीक के उपयोग को मानवीय निर्णय क्षमता के सहयोगी के रूप में विकसित करने पर जोर रहेगा।90 दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत ऑनलाइन आइडिएशन से होगी। इसके बाद प्रोटोटाइप निर्माण, मेंटरिंग और मूल्यांकन के विभिन्न चरण आयोजित किए जाएंगे। देहरादून समेत राज्य के प्रमुख शैक्षणिक एवं तकनीकी केंद्रों में नवाचार गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।स्थानीय समस्याओं को अवसरों में बदलने की पहलहैकाथॉन का उद्देश्य उत्तराखंड के शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी विभागों, तकनीकी समुदाय और युवा इनोवेटर्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य की स्थानीय समस्याओं के समाधान स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीक के माध्यम से तलाशे जा सकें।यह पहल सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) द्वारा Axolotl Emprise LLP तथा संस्थागत एवं इकोसिस्टम सहयोगियों के साथ आयोजित की जा रही है। आयोजकों का लक्ष्य ऐसे नवाचारों की श्रृंखला तैयार करना है, जो उत्तराखंड को अधिक स्मार्ट, सक्षम, लचीला और तकनीक-सक्षम राज्य बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सके।





