ऋषिकेश में वन भूमि सर्वे के विरोध में उग्र प्रदर्शन, रेलवे ट्रैक जाम से ट्रेनें ठप, पुलिस पर पथराव – पर्वतजन

ऋषिकेश, 28 दिसंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वन विभाग द्वारा खाली वन भूमि के चिन्हीकरण और सर्वे की कार्रवाई से क्षेत्रीय निवासी भय और आक्रोश से ग्रस्त हैं। इसके चलते स्थानीय लोगों ने बड़े स्तर पर विरोध जताया है, जिसमें सड़क के बाद अब रेलवे ट्रैक को भी अवरुद्ध कर दिया गया। स्थिति तनावपूर्ण हो गई है और कई इलाकों में हंगामा देखने को मिल रहा है।
मनसा देवी रेलवे क्रॉसिंग के निकट सैकड़ों की संख्या में लोग, जिनमें बड़ी तादाद महिलाओं की है, ट्रैक पर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी जमीन किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। इस जाम के कारण योग नगरी स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनें प्रभावित हुईं। कोच्चिवेली से आई गंगानगर एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनें डेढ़ घंटे से अधिक समय तक ट्रैक पर खड़ी रहीं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हुई। अन्य रेलगाड़ियों का संचालन भी बाधित हुआ।
मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र कर लोगों को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर डटे हुए हैं। तनाव बढ़ने पर भीड़ में से किसी ने पुलिस पर पत्थर फेंका, जिसके बाद पथराव शुरू हो गया। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और पीएसी की अतिरिक्त टीम को बुलाया गया। कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।


इसके अलावा शिवाजी नगर क्षेत्र में एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें पार्षद सुरेंद्र सिंह नेगी और अभिनव सिंह मलिक के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। बैठक में वन विभाग की कार्रवाई पर चर्चा हुई और विचार व्यक्त किए गए। पार्षद अभिनव सिंह मलिक ने कहा कि यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर हो रही है और केवल खाली भूमि की पहचान की जा रही है। उन्होंने लोगों से घबराने की आवश्यकता नहीं बताई तथा बताया कि 5 जनवरी को मामले की अगली सुनवाई है। आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने के लिए कमेटी गठित की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों ने जल्द ही बड़ी जनसभा आयोजित कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री सुबोध उनियाल को आमंत्रित करने का निर्णय लिया है। साथ ही, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से विशेष सत्र बुलाकर वन भूमि पर बसे क्षेत्रों को विशेष कानून के अंतर्गत अधिकार देने की मांग की गई है।
यह विवाद ऋषिकेश क्षेत्र की लगभग 2,866 एकड़ भूमि से संबंधित है, जो 26 मई 1950 को 99 वर्ष की लीज पर पशु लोक सेवा मंडल संस्थान को आवंटित की गई थी। लीज की अवधि 2049 तक है और इसका उपयोग पशुपालन, बागवानी, चारा उत्पादन आदि के लिए निर्धारित था। हालांकि, समय के साथ इस भूमि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों से हटकर व्यावसायिक गतिविधियों और सब-लीज में किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कब्जों की जांच और कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए हैं।

राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) धीरज पांडे कर रहे हैं। समिति गूगल मैप, दस्तावेजों की जांच और स्थलीय सत्यापन के माध्यम से वास्तविक स्थिति का आकलन कर रही है।

Sapna Rani

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