बांधों से पानी छोड़ने से पहले देनी होगी चेतावनी, डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर असर का भी होगा आकलन –

 
मानसून में बांधों और बैराजों की रियल टाइम निगरानी के निर्देश, सुबह-शाम यूएसडीएमए को भेजनी होगी जलस्तर व डिस्चार्ज रिपोर्ट
देहरादून। मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और जलभराव जैसी आपदाओं से समय रहते निपटने के लिए राज्य सरकार ने बांधों और बैराजों की निगरानी व्यवस्था को और अधिक सख्त कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने स्पष्ट किया कि अब राज्य के सभी प्रमुख बांध एवं बैराज प्रतिदिन सुबह 8 बजे और शाम 8 बजे जलाशयों के जलस्तर, इनफ्लो, आउटफ्लो तथा डिस्चार्ज की विस्तृत रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएंगे।
उन्होंने निर्देश दिए कि यदि किसी भी बांध या बैराज से पानी छोड़ा जाना प्रस्तावित हो तो इसकी अग्रिम सूचना राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और संबंधित जिला प्रशासन को देना अनिवार्य होगा। सूचना में यह भी बताया जाएगा कि छोड़ा गया पानी कितने समय में किन-किन डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों तक पहुंचेगा, नदी के जलस्तर में कितनी वृद्धि होगी और उससे संभावित खतरा कितना है। इससे प्रशासन समय रहते संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा अन्य एहतियाती कदम उठाने में सक्षम होगा।
बैठक में मानसून के दौरान सभी बांधों एवं जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े नदी जलस्तर सेंसर और डिस्चार्ज मॉनिटरिंग सिस्टम का डेटा एपीआई के माध्यम से रियल टाइम में यूएसडीएमए के साथ साझा करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और अर्ली वार्निंग सिस्टम का विस्तार करने पर जोर दिया गया। टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन को अपने क्षेत्र में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 25 करने के निर्देश दिए गए।
सचिव ने कहा कि एक ही नदी तंत्र में स्थित अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम बांधों तथा बैराजों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। सभी परियोजनाएं वर्षा, जलस्तर और डिस्चार्ज से संबंधित सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान करें ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में अधिकारियों ने डिस्चार्ज सायरन, चेतावनी उपकरणों और विभिन्न सेंसरों की नियमित जांच करने, बाढ़ संभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव उपकरणों की अग्रिम तैनाती तथा जल निकासी व्यवस्था को पहले से दुरुस्त रखने के निर्देश भी दिए, जिससे भारी वर्षा के दौरान जनहानि और जलभराव जैसी आपदाओं के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।

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