देहरादून: उत्तराखंड में तेजी से गिरते भूजल स्तर को देखते हुए सरकार ने अब अवैध भूजल दोहन और पानी की चोरी करने वालों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है. राज्य में बिना अनुमति भूजल इस्तेमाल करने पर अब पहले से दोगुना जुर्माना वसूला जाएगा. खास तौर पर देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जैसे जिलों में सख्त निगरानी शुरू कर दी गई है, जहां भूजल का अत्यधिक दोहन लगातार चिंता का विषय बना हुआ है.
राज्य सरकार और भूजल विभाग की ओर से जारी नए निर्देशों के अनुसार अब होटल, रिसॉर्ट, इंडस्ट्री, कमर्शियल संस्थान और बड़े भवन परियोजनाओं को भूजल इस्तेमाल करने से पहले अनिवार्य रूप से अनुमति लेनी होगी. नए नियमों के तहत उद्योग, हाउसिंग सोसायटी और व्यावसायिक संस्थानों को भूजल इस्तेमाल करने के लिए सिंचाई विभाग से 5000 रुपये शुल्क देकर एनसीओसा लेना अनिवार्य कर दिया गया है. बिना एनओसी बोरिंग कराने या भूजल उपयोग करते पाए जाने पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा. इसके साथ ही पुराने मामलों की भी समीक्षा शुरू कर दी गई है.
इन 4 कैटेगरी में बांटा गया है क्षेत्रनई नीति के तहत सरकार ने भूजल उपलब्धता के आधार पर क्षेत्रों को सुरक्षित, अर्द्ध गंभीर, गंभीर और अतिदोहित कैटेगरी में बांटा है. जिन इलाकों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, वहां पानी की निकासी सीमित कर दी गई है. खासतौर पर हरिद्वार के भगवानपुर और लक्सर, देहरादून के राजपुर रोड और सहस्रधारा रोड तथा नैनीताल के काठगोदाम और गोलापार क्षेत्रों में सख्त नियंत्रण लागू रहेगा.
इन्हें मिलेगी छूट, ये किया गया अनिवार्यसरकार जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वर्षा जल संचयन और रीसाइक्लिंग सिस्टम लगाने वाले संस्थानों को राहत भी दे रही है, जो संस्थान पानी बचाने की तकनीक अपनाएंगे और कम से कम 25 प्रतिशत पानी का पुनः उपयोग करेंगे, उन्हें भूजल शुल्क में 10 फीसदी की छूट मिलेगी. 300 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र वाले भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना भी अनिवार्य कर दिया गया है.
वहीं नियमों के तहत भूजल उपयोग के लिए क्षेत्रों और उद्योगों के अनुसार निर्धारित शुल्क तय किया गया है. सरकार का मानना है कि राज्य के कई हिस्सों में लगातार बढ़ते निर्माण कार्य, पर्यटन गतिविधियां और औद्योगिक उपयोग के कारण भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है. खासकर देहरादून और हरिद्वार में कई इलाकों में जल संकट की स्थिति बनने लगी है. ऐसे में अब भूजल संरक्षण को लेकर प्रशासन पूरी तरह सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है.
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