जहां पढ़े दो मुख्यमंत्री उस स्कूल की हालत खस्ता
लैंसडाउन क्षेत्र का ऐतिहासिक जीआईसी जयहरीखाल, जहां दो मुख्यमंत्री अपनी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, आज भी विकास योजना के इंतजार में है। झारखंड के नेत्रहाट स्कूल की तर्ज पर इसे आवासीय विद्यालय के रूप में विकसित करने की योजना शिक्षा विभाग ने बनाई थी, लेकिन बीते चार वर्षों में बजट स्वीकृति न मिलने के कारण यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और अभिभावक लगातार मांग कर रहे हैं कि इस योजना को प्राथमिकता दी जाए ताकि गढ़वाल क्षेत्र के मेधावी विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा का अवसर मिल सके। उनका कहना है कि यदि यह परियोजना पूरी होती है, तो जीआईसी जयहरीखाल एक मॉडल शैक्षणिक केंद्र बन सकता है और अपनी ऐतिहासिक पहचान फिर से हासिल कर सकता है।

 
चार साल से अधर में विकास कार्य
जीआईसी जयहरीखाल को आवासीय विद्यालय के रूप में विकसित करने की घोषणा वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने की थी। योजना के तहत 60 प्रतिशत धनराशि हंस फाउंडेशन और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार को देनी थी। हंस फाउंडेशन ने विद्यालय भवन के डी ब्लॉक की छत की टिन बदलने सहित दीवार, फर्श, खिड़कियों और दरवाजों की मरम्मत तो कराई, लेकिन राज्य सरकार से बजट न मिलने के कारण वर्ष 2022 में निर्माण कार्य रोक दिया गया। तब से यह योजना अधर में लटकी हुई है। वर्ष 1922 में दान में मिली करीब 700 नाली भूमि पर स्थापित यह विद्यालय पौड़ी जनपद का ऐतिहासिक शैक्षणिक केंद्र रहा है, जहां से अनगिनत विद्यार्थी राजनीति, प्रशासन, सेना और विज्ञान के क्षेत्र में नाम कमा चुके हैं। इस विद्यालय के पूर्व छात्र प्रमुख हस्तियों में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत और आईएएस टॉपर अनुराग श्रीवास्तव शामिल हैं।

लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

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