

देहरादून; उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन एवं नियमों में सख्ती के बाद आधे से ज्यादा मदरसे बंद हो गए हैं। राज्य में 452 रजिस्टर्ड मदरसों में से 227 मदरसे खुद ही उनके संचालकों ने बंद कर लिए हैं, वहीं 19 मदरसों को मानकों का उल्लंघन करने पर प्रशासन ने बंद कराया है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी की ओर से इस संबंध में शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा अब तक कुल 35 अल्पसंख्यक संस्थाओं को मान्यता प्रदान की गई है, जिनमें 33 मदरसे और दो अन्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान हैं। वहीं शिक्षा विभाग से अब तक 76 मदरसों को मान्यता मिली है और 114 ने आवेदन किया है। बता दें कि अब उत्तराखंड में मदरसा संचालन के लिए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण और शिक्षा विभाग से मान्यता लेना अनिवार्य है।
देहरादून में 41 मदरसों में से छह को शिक्षा विभाग से मान्यता मिली है। नैनीताल जिले में 18 मदरसों में से दो को मान्यता मिली है। अल्मोड़ा, चम्पावत, पिथौरागढ़ में चार मदरसे हैं, इनकी रिपोर्ट नहीं मिली है।
हरिद्वार में 151 मदरसे बंदहरिद्वार में सबसे ज्यादा 151 मदरसे खुद से बंद कर लिए गए हैं। 270 मदरसों में से 44 को शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त है, 70 मदरसों के आवेदन लंबित हैं। पांच मदरसों पर सील लगाई गई है, 26 मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता मिली है। यूएसनगर में 119 मदरसों में से 24 को शिक्षा विभाग से मान्यता मिली है, 23 मदरसों ने आवेदन किया है, 52 मदरसे बंद हैं, आठ मदरसे सील हैं और दो मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त है।
डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, अध्यक्ष, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, ”जिन मदरसा संचालकों ने अपने मदरसे खुद बंद किए हैं, उनसे वहां पढ़ने वाले बच्चों के बारे में जानकारी और मदरसे बंद करने की अंडरटेकिंग ली जा रही है। सील मदरसों के छात्रों को पास के स्कूलों में शिफ्ट किया जा रहा है।”
गौरतलब है कि, उत्तराखंड को 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग कर नया राज्य बनाया गया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते 2 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के रामपुर तिराहे पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अमर शहीदों की स्मृति में उनकी प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए शिलान्यास किया। इस मौके पर धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने ‘लैंड जिहाद’ पर रोक लगाने के लिए लगभग 13,000 एकड़ सरकारी ज़मीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। उन्होंने कहा कि राज्य में ‘लव जिहाद’ को रोकने के लिए धर्मांतरण-रोधी कानून भी लागू किया गया है और उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और जिम्मेदारियां सुनिश्चित करने वाला ‘समान नागरिक संहिता’ लागू किया है। राज्य सरकार ने एक नया कानून बनाकर मदरसा बोर्ड को खत्म कर दिया है।



