
देहरादून। विकास और पारिस्थितिकी के संतुलन का बेजोड़ नमूना है दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे। इस पर गणेशपुर से डाटकाली तक एलिवेटेड रोड के रूप में बना खूबसूरत वन्यजीव गलियारा अपनी तमाम खूबियों के कारण ध्यान खींचता है। यह उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व और उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग के मध्य से गुजरता है। इसके नीचे से वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही भी शुरू हो गई है। इससे राजाजी के वन्यजीवों को हरियाणा के कलेसर राष्ट्रीय उद्यान तक स्वच्छंद विचरण की आजादी मिली है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को इस एक्सप्रेसवे के लोकार्पण से पहले मोहंड में इस एलिवेटेड रोड पर मोहंड में बने व्यू प्वाइंट पर रुककर गलियारे को देखने के साथ ही राजाजी व शिवालिक की पहाड़ियों को निहारा।
वन्यजीवन के दीदार को बढ़ेगी सैलानियों की तादादइस वन्यजीव गलियारे से गुजरते समय यात्री तो सुखद अहसास करेंगे ही, अब मोहंड के पास राजाजी टाइगर रिजर्व की चिल्लावाली रेंज में स्थित पर्यटक जोन में भी पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है। चिल्लावाली पर्यटक जोन में गुलदार, हाथी, हिरन समेत दूसरे वन्यजीवों की बहुतायत है।
इनका करीब से दीदार करने सैलानी वहां आते हैं, लेकिन अब वहां इनकी संख्या बढ़ेगी। कारण यह कि पूर्व में सड़क के कारण वन्यजीवों की चिल्लावाली से शिवालिक रेंज में आने-जाने में कठिनाई होती थी। अब गलियारा जीवंत होने से सैलानियों को वन्यजीवन का अधिक सुगमता से दीदार हो सकेगा।
तीन जोन में बंटा है वन्यजीव गलियारायह वन्यजीव गलियारा तीन जोन में बंटा है। इसमे गणेशपुर, मोहंड व आशारोड़ी तक का क्षेत्र शामिल है।
ऐसे निकली गलियारे की राहदिल्ली-दून एक्सप्रेसवे का आखिरी 20 किलोमीटर का हिस्सा उप्र के शिवालिक वन प्रभाग और उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्रों से गुजरता है। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-72 ए में गणेशपुर से देहरादून तक इस प्रोजेक्ट में उत्तराखंड की 9.6224 हेक्टेयर वन भूमि और उत्तर प्रदेश के हिस्से वाली 47.7054 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित की गई।
यह हैं फायदेकारिडोर बनने से सुरक्षित व सुगम हुआ वन्यजीवों का आवागमनवन्यजीवों की दुर्घटनाओं में होने वाली क्षति होगी न्यूनपहली बार विस्तृत भाग में नदी व वन क्षेत्र से बनी एलिवेटेड रोडवन्यजीवों के विचरण का दायरा बढऩे से उत्तम गुणवत्ता का वन्यजीव जीन पूल होगा तैयार
