
‘मामा टीटी’ बनकर मजदूरों को लगाते थे चूना! गरीब मजदूरों को AC कोच में सफर का झांसा देकर उड़ाए ₹90,500, हरिद्वार में पांच आरोपी गिरफ्तार, दीपावली से पहले पुलिस की बड़ी कार्रवाई
‘मेरे मामा रेलवे में टीटी हैं’ कहकर जीतते थे भरोसा, फिर मोबाइल का PIN लेकर खाली कर देते थे बैंक खाते; GRP ने 30 घंटे के भीतर पांच आरोपियों को दबोचा
दीपावली से पहले मजदूरों को मिली राहत, ₹25 हजार नकद और मोबाइल बरामद, करीब ₹50 हजार की रकम कराई गई फ्रीज
हरिद्वार। त्योहार पर अपने परिवार के साथ दीपावली मनाने और बच्चों के लिए खुशियां लेकर घर लौटने का सपना देख रहे मेहनतकश मजदूरों को निशाना बनाने वाले कथित ठग गिरोह का जीआरपी हरिद्वार ने पर्दाफाश किया है। खुद को रेलवे कर्मचारियों का रिश्तेदार बताकर जनरल टिकट को एसी कोच में बदलवाने का झांसा देने वाले पांच आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
आरोप है कि गिरोह के सदस्य पहले मजदूरों का विश्वास जीतते थे, फिर रेलवे के नियमों का हवाला देकर उनका मोबाइल फोन, PIN, नकदी और सामान अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद उनके बैंक खातों से रकम निकालकर फरार हो जाते थे।
जीआरपी के अनुसार, आरोपियों ने दो मजदूरों को निशाना बनाकर उनके खातों से कुल 90,500 रुपये निकाल लिए थे। पुलिस ने 25 हजार रुपये नकद और पीड़ित का मोबाइल बरामद किया है, जबकि करीब 50 हजार रुपये की रकम बैंक खाते में फ्रीज कराई गई है।
जीआरपी कप्तान अरुणा भारती के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस टीम को ढाई हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
ऐसे रचते थे ठगी का जाल, ‘मामा टीटी’ बनकर करते थे भरोसे का नाटक
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य रेलवे स्टेशन पर ऐसे यात्रियों की तलाश करते थे, जो कम पढ़े-लिखे हों और रेलवे की टिकट व्यवस्था से ज्यादा परिचित न हों।
गिरोह के दो सदस्य पहले यात्रियों से बातचीत शुरू करते और खुद को बिहार जाने वाला बताते थे। इसके बाद वे कहते कि उनका मामा रेलवे में टीटी है, जो जनरल टिकट को एसी थर्ड कोच में बदलवा सकता है।
इसके बाद गिरोह का एक अन्य सदस्य कथित तौर पर टीटी जैसा व्यवहार करते हुए सामने आता था। वह रेलवे के नियमों का हवाला देकर यात्रियों को समझाता कि एसी कोच में सफर करने से पहले सामान, मोबाइल, नकदी और अन्य वस्तुओं का विवरण जमा करना जरूरी है।
आरोप है कि इस बहाने यात्रियों से मोबाइल फोन, उसका PIN, बैग, कपड़े और नकदी ले ली जाती थी। फिर उन्हें किसी स्थान पर बैठकर रसीद का इंतजार करने को कहा जाता था। इसी दौरान उनके बैंक खातों से रकम निकाल ली जाती थी और गिरोह के सदस्य गायब हो जाते थे।
दस महीने की मेहनत की कमाई पर लगा झटका
जीआरपी के अनुसार, घटना 10 अक्टूबर 2026 की रात की है। पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के निवासी बिस्वजीत सौरेन और उनके साथी रंजीत कोरा हरिद्वार में दिहाड़ी मजदूरी करते थे।
दोनों करीब एक साल से मेहनत-मजदूरी कर पैसे जोड़ रहे थे, ताकि दशहरा और दीपावली पर अपने घर लौटकर परिवार के साथ त्योहार मना सकें। इसी सिलसिले में वे हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुंचे और आसनसोल जाने के लिए जनरल टिकट खरीदे।
ट्रेन का इंतजार करते समय उनकी मुलाकात कथित ठगों से हुई। आरोपियों ने उन्हें एसी कोच में सीट दिलाने का भरोसा दिया और रेलवे के नियमों की कहानी सुनाकर उनका विश्वास जीत लिया।
दोनों मजदूर आरोपियों की बातों में आ गए और उन्होंने करीब 12 हजार रुपये नकद के साथ मोबाइल फोन, PIN और बैग आदि उन्हें सौंप दिए।
काफी देर तक रसीद का इंतजार करने के बाद जब उन्हें शक हुआ और उन्होंने बैंक से जानकारी ली, तो पता चला कि उनके खातों से 90,500 रुपये निकाले जा चुके थे।
इसके बाद दोनों पीड़ित जीआरपी हरिद्वार पहुंचे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की।
CCTV और मुखबिर तंत्र से 30 घंटे में पांच आरोपी गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए जीआरपी हरिद्वार ने मैन्युअल पुलिसिंग, सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर तंत्र और पीड़ितों द्वारा बताए गए आरोपियों के हुलिए के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
पुलिस के मुताबिक, करीब 30 घंटे के भीतर पांचों आरोपियों को हरिद्वार रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी बिहार की ओर जाने वाली ट्रेन पकड़ने की फिराक में थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
1. सौरभ मंडल (24 वर्ष) — निवासी जिला मुंगेर, बिहार।
2. सुमित मंडल (20 वर्ष) — निवासी जिला मुंगेर, बिहार।
3. किशन कुमार (19 वर्ष) — निवासी जिला भागलपुर, बिहार।
4. जितेंद्र कुमार चौधरी (24 वर्ष) — निवासी जिला मुंगेर, बिहार।
5. बंटी कुमार (20 वर्ष) — निवासी जिला मुंगेर, बिहार।
पुलिस के अनुसार, पांचों आरोपी बिहार के रहने वाले हैं। उनके आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रही है।
25 हजार नकद और मोबाइल बरामद, करीब 50 हजार रुपये फ्रीज
जीआरपी हरिद्वार की कार्रवाई में निम्न बरामदगी हुई है:
25,000 रुपये नकद बरामद।
पीड़ित का वनप्लस मोबाइल फोन बरामद, जिसकी कीमत लगभग 17,300 रुपये बताई गई है।
बैंक खाते में ट्रांसफर की गई करीब 50 हजार रुपये की रकम फ्रीज कराई गई।
पुलिस के विवरण के अनुसार, फ्रीज कराई गई रकम 49,999 रुपये है। विभागीय और बैंकिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह राशि पीड़ित के खाते में वापस कराने का प्रयास किया जाएगा।
इस मामले में दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2) और 3(5) भी बढ़ाई गई हैं।
कप्तान अरुणा भारती ने पुलिस टीम को दी बधाई
जीआरपी कप्तान अरुणा भारती ने कार्रवाई को सराहनीय बताते हुए कहा कि मेहनतकश लोगों की खून-पसीने की कमाई हड़पने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पुलिस टीम ने बेहतर काम किया है और फ्रीज की गई रकम को दीपावली से पहले पीड़ित के खाते में वापस कराने का प्रयास किया जाएगा।
सीओ जीआरपी अनुज के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में हुई इस कार्रवाई पर पुलिस टीम की सराहना की गई। कप्तान ने टीम के लिए 2,500 रुपये के पुरस्कार की घोषणा भी की।
कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम
जीआरपी हरिद्वार की टीम में एसएचओ बिपिन चंद्र पाठक, उपनिरीक्षक प्रीति कर्णवाल, एएसआई अतुल चौहान, श्यामसुंदर दास और कैलाश नाथ सहित हेड कांस्टेबल पृथ्वी नेगी, अनिल कुमार तथा अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
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यात्रियों के लिए जरूरी सावधानी
रेलवे स्टेशन पर कोई अनजान व्यक्ति यदि जनरल टिकट को एसी टिकट में बदलवाने, सामान जमा कराने या बैंक खाते से संबंधित जानकारी मांगता है, तो सावधान रहें।
किसी अनजान व्यक्ति को मोबाइल का PIN, OTP या बैंकिंग पासवर्ड न बताएं।
टिकट में बदलाव के लिए केवल अधिकृत रेलवे काउंटर या रेलवे के आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करें।
किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत रेलवे पुलिस को दें।
हरिद्वार जीआरपी की कार्रवाई ने त्योहारों के दौरान रेलवे स्टेशनों पर सक्रिय ठगी के तरीकों को उजागर किया है। यात्रियों की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ही ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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