रुद्रप्रयाग। आदर्श संस्कृत ग्राम बेंजी में उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के प्रचार-प्रसार, संरक्षण एवं संवर्द्धन के संकल्प के साथ संस्कृत सप्ताह का भव्य शुभारम्भ हुआ। संस्कृत शोभायात्रा के साथ शुरू हुए आयोजन में ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संस्कृत के दिव्य उद्घोषों और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा गांव संस्कृतमय नजर आया।शोभायात्रा में ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण का परिचय दिया। इसके पश्चात गांव के मध्य स्थित शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज की स्मृति में निर्मित संग्रहालय भवन परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य गंभीर सिंह बिष्ट ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अयोध्या प्रसाद बेंजवाल ने की, जबकि संस्कृताचार्य उमेश भट्ट विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।संस्कृत की समृद्ध विरासत का केंद्र है बेंजीबेंजी ग्राम प्राचीन काल से ही संस्कृत विद्वानों एवं संस्कृत साधना की भूमि रहा है। इसी पावन धरती पर शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी महाराज का उद्भव हुआ, जिन्होंने अपने संस्कृत ज्ञान एवं साधना के माध्यम से देश-विदेश में संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया। आज भी गांव के अनेक संस्कृतज्ञ इस दिव्य भाषा के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।राज्य सरकार द्वारा बेंजी को आदर्श संस्कृत ग्राम घोषित किए जाने के बाद 10 अगस्त 2025 को इसका विधिवत उद्घाटन किया गया था। वर्तमान में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के माध्यम से नियुक्त शिक्षक ग्रामीणों को सरल संस्कृत का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। इसके माध्यम से संस्कृत को केवल अध्ययन की भाषा न बनाकर दैनिक बोलचाल एवं जनजीवन का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्राम में संस्कृत भाषा के माध्यम से विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रम भी निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं।संस्कृत में निहित है विश्व मंगल की भावनामुख्य अतिथि गंभीर सिंह बिष्ट ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सनातन ज्ञान परंपरा, संस्कृति और जीवन मूल्यों की दिव्य धरोहर है। जन्म से लेकर जीवन पर्यंत संस्कृत हमारे संस्कारों और आध्यात्मिक परंपराओं के साथ जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस अलौकिक भाषा को अक्षुण्ण एवं जीवंत बनाए रखना हम सभी का नैतिक दायित्व है। संस्कृत में विश्व मंगल की कामना निहित है और मानव जीवन को संस्कारित एवं सुव्यवस्थित करने की अद्भुत क्षमता भी इसी भाषा में विद्यमान है।कार्यक्रम संयोजक जदम्बा प्रसाद बेंजवाल ने आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन एवं समग्र व्यवस्थापन सहायक निदेशक संस्कृत शिक्षा, रुद्रप्रयाग मनसाराम मैंदुली के कुशल नेतृत्व में हुआ। इस अवसर पर ग्रामीणों के साथ विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने संस्कृत में मनमोहक एवं विशिष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।कार्यक्रम में दीपक बेंजवाल, सत्य प्रकाश, मनोज, अरुण प्रसाद, नीलकंठ, सुधा देवी, सुलोचना देवी, भागीरथी देवी, उर्मिला देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।बेंजी की पावन धरती से संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्द्धन का यह प्रयास निश्चित रूप से भारतीय संस्कृति और समृद्ध भाषायी विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संस्कृत सप्ताह का यह आयोजन गांव में संस्कृत के प्रति नई चेतना, संस्कार और गौरव की भावना जागृत करने वाला बन गया।
