जुड़वा बच्चीयों को ना संभाल सकी 20 वर्षीय माँ , गुस्से में आकर कर दी दोनों बच्चीयों की हत्या – myuttarakhandnews.com

जनपद हरिद्वार : हरिद्वार जनपद की सनसनी घटना 8 मार्च को तब सामने आयी जब जनपद टिहरी निवासी महेश सकलानी ने अपनी जुड़वा बच्चियों की हत्या किये जाने का शक जाहिर कर हरिद्वार कोतवाली में मुकदमा दर्ज करवाया था ।
जानकारी अनुसार गुरुवार 6 मार्च को दोनों बच्चियां बेहोशी की अवस्था मे हस्र में मिली थी ,जिसको उनकी मॉन अस्पताल ले कर गयी ,जहाँ डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित किया ।हांलाकि मामला 2 दिन बाद 8 मार्च 2025 को दर्ज किया गया ।
मामला दर्ज होने के बाद ज्वालापुर पुलिस द्वारा जांच शुरू की गयी ,जिसमें बच्चियों के घर के आसपास, पड़ोसियों, जान पहचान वाले लोगों और रिश्तेदारों से पूछताछ के साथ आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर सुबह के समय बच्चियों की मां के दूध लेने जाने और घर वापस आने तक किसी भी व्यक्ति का घर मे आने जाने के सबूत नहीं मिले ।
महेश की पत्नी शिवांगी के बयानों पर पुलिस को शक हुआ ,जिस पर शिवांगी से कड़ी पूछताछ की गयी ,जिस पर शिवांगी ने बताया कि “उसकी दोनों जुड़वां बच्चियां हर समय रोती रहती थी, कम उम्र और साथ में कोई अन्य परिजन न होने की वजह से उसे बिल्कुल भी आराम नहीं मिलता था , जिससे उसका चिड़चिड़ापन बढ़ता गया ।
बच्चियों की वजह दे वो कई महीनों से रातों को सो नहीं पायी थी ,बार बार गुस्से और झल्लाहट की वजह से उसके अपने पति से भी रिश्ते खराब हो रहे थे ।
6 मार्च को भी पति महेश ड्यूटी चला गया , दोनों बच्चियां रोने लगी जिससे गुस्से में में आकर उसने बच्चीयों का मुँह रजाई से दबा दिया , जिससे बच्चियां और तेज चिल्लाने लगी तो शिवांगी ने चुन्नी से बच्चियों गला दबा दिया ।इसके बाद वह रोजाना की तरह सुबह के समय दूध लेने गयी ,ताकि किसीको उस पर शक ना हो ।वापस आकर उसने बच्चियों के बेहोश होने की कहानी गढ़ी व पड़ोसी की मदद से उनको हॉस्पिटल ले गयी ।पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में बच्चीयों की मौत दम घुटने और गला दबाने से हुई बताया गया है ।
महिला जो कि अभी महज 20 वर्ष की है ,मूल रूप से जनपद टिहरी की निवासी है ,जिसका पति हरिद्वार सिडकुल किसी दवा फैक्ट्री में कार्य करता है ।दोनों अपनी दोनों बच्चीयों के साथ मोहल्ला चकलान कोतवाली ज्वालापुर (हरिद्वार) में रहते थे , जहां से महिला को गिरफ्तार किया गया ।परिजनों को महिला की इस हरकत पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा है ,हालाँकि मनोचिकित्सक इसको पोस्ट प्रेग्नेंसी डिप्रेशन के लक्षण बताते है,जिसमे महिलाएं बच्चों को जन्म देने के बाद डिप्रेशन में जाती है ,क्योंकि उनको परिजनों से वो अपेक्षाकृत सहयोग नहीं मिल पाता जो वह कल्पना करती है ।ऐसे में कई महिलाएं आत्महत्या तक का कदम उठा देती है ,डिप्रेशन की यह स्थिति सबसे घातक मानी जा सकती है जब एक माँ उन मासूमों को खत्म कर देती है जब जिनको मां ने 9 महीने गर्भ में रखा ।भविष्य में कोई ऐसी घटना घटित ना हो ,सभी परिजनों को गर्भावस्था व गर्भावस्था के बाद भी महिलाओं का ख्याल रखने की आवश्यकता है , तथा कम उम्र में बड़ी जिमेदारिया भी कहीं ना कही इस घटना के पीछे की कारण हो सकता है ।

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