देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से चर्चा में रहे ‘वीआईपी’ नाम को लेकर उठे नए सवालों के बाद यह मामला दोबारा सुर्खियों में आ गया है। इसको लेकर विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड पहले से ही बेहद संवेदनशील मामला रहा है। अब जांच प्रक्रिया, घटनाक्रम और इससे जुड़े पहलुओं को लेकर नए सिरे से सवाल खड़े हो रहे हैं। शुरुआत से ही इस केस में प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर चर्चाएं होती रही हैं, जिस पर विपक्ष लगातार सरकार की कार्यप्रणाली और जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाता रहा है।
हत्याकांड के बाद घटनास्थल पर की गई कार्रवाई, सबूतों के संरक्षण और जांच की दिशा को लेकर भी आशंकाएं जताई जा रही हैं। ‘वीआईपी’ नाम को लेकर चल रही चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। इससे सरकार पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है और इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है।
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