उत्तराखंड उच्च न्यायालय में वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।।
दरअसल, मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंद्र ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के लिए नई पीठ (Bench) का गठन किया है।
यह कदम तब उठाया गया जब अब तक 16 न्यायाधीश इस मामले से खुद को अलग (Recuse) कर चुके हैं — जो भारतीय न्यायिक इतिहास में एक “अनोखा रिकॉर्ड” बन गया है।
अब नई पीठ करेगी सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की दो सदस्यीय खंडपीठ अब इस मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर को करेगी।यह पीठ CAT और उसकी रजिस्ट्री के सदस्यों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर विचार करेगी।
क्या है पूरा मामला?
IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी, जिन्होंने दिल्ली के एम्स (AIIMS) में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) रहते हुए कई भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा किया था, लंबे समय से सरकारी एजेंसियों और न्यायिक मंचों पर लड़ाई लड़ रहे हैं।उन्हें एक “व्हिसलब्लोअर अधिकारी” के रूप में भी जाना जाता है।
17 अक्टूबर 2024 को CAT ने उनके खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर (Suo Moto) अवमानना कार्यवाही शुरू की थी।हालांकि, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस कार्यवाही पर 7 अक्टूबर 2025 तक रोक लगा दी थी।
इसके बावजूद CAT ने 12 सितंबर 2025 को एक वरिष्ठ अधिवक्ता को न्यायमित्र (Amicus Curiae) नियुक्त करते हुए आगे की कार्यवाही जारी रखी, जिसे चतुर्वेदी ने अदालत में चुनौती दी।
अब तक 16 न्यायाधीश हो चुके हैं अलग
इस केस की विशेषता यह है कि अब तक 16 न्यायाधीश इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुके हैं।इनमें शामिल हैं: न्यायमूर्ति आलोक वर्मा,न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी,,न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल,न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और इसके अलावा 12 अन्य न्यायाधीश भी चतुर्वेदी से जुड़े मामलों से खुद को अलग कर चुके हैं।
निचली अदालत और CAT के जज भी अलग
केवल हाईकोर्ट ही नहीं, बल्कि नैनीताल स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने भी चतुर्वेदी से जुड़े एक आपराधिक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।इसके अलावा, CAT के जज हरविंदर कौर ओबेरॉय और बी. आनंद की खंडपीठ ने भी इस केस से Recuse कर लिया।
अगली सुनवाई
अवमानना याचिका पर अब 30 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ सुनवाई करेगी।
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