मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में आयोजित प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस” को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने समान नागरिक संहिता को तैयार करने वाले कमेटी के सदस्यों, कुशल क्रियान्वयन करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण में योगदान देने वाले वीएलसी को भी सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यूसीसी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा, इसी दिन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू हुई है, जिससे समाज में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना सुनिश्चित हो सकी।
उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और परंपरा सदैव समरसता और समानता की संवाहक रही है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी गीता में “समोहम सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योस्ति न प्रियः” का उपदेश दिया है, जिसका अर्थ है कि मैं सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता हूँ, न किसी का शत्रु हूँ और न ही किसी के प्रति पक्षपात करता हूँ। सनातन संस्कृति की यही महानता है, जिसने सदियों से दुनिया को समानता, न्याय और मानवता का मार्ग दिखाया है।
सच किया संविधान निर्माताओं का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं ने ‘‘समान नागरिक संहिता’’ को संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में सम्मिलित किया था। उनका मत था कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में उन्होंने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व, अपने दृष्टिपत्र में राज्य में “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का संकल्प लिया। देवभूमि की जनता ने भी इस “देवकार्य” के लिए भाजपा को अपार समर्थन और आशीर्वाद प्रदान किया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उन्होंने दुबारा सत्ता संभालते ही पहले दिन से ही उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने के लिए कार्य प्रारंभ किया। इसी क्रम में 7 फरवरी 2024 को समान नागरिक संहिता विधेयक को राज्य विधानसभा में पारित कर राष्ट्रपति महोदया को भेजा गया। जिसे 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। इसके बाद सभी आवश्यक नियमावली एवं प्रक्रियाओं को पूर्ण करते हुए, राज्य सरकार ने 27 जनवरी, 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को विधिवत रूप से लागू कर दिया।
महिला सशक्तिकरण के नए युग की शुरुआत
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि समाज में कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई थी। यूसीसी लागू होने से न केवल राज्य से सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं बल्कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत भी हुई है। अब उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया। यही कारण है कि मुस्लिम महिलाओं ने इस कानून का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात कई दशकों तक वोट बैंक की राजनीति के कारण, यूसीसी को लागू करने का साहस नहीं दिखाया गया। जबकि दुनिया के सभी विकसित और सभ्य देशों सहित प्रमुख मुस्लिम राष्ट्रों में समान नागरिक संहिता पहले से ही लागू है।
सिर्फ घोषणा नहीं सफल क्रियान्वयन भी किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये उनके लिए निजी तौर पर अत्यंत गर्व का विषय है कि उन्होंने समान नागरिक संहिता को घोषणा से लेकर धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित करके दिखाया है। उन्होंने कहा कि बीते एक वर्ष में राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता के माध्यम से नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं की पहुंच को और अधिक सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाया है। जहां यूसीसी लागू होने से पहले हमारे राज्य में औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण हुआ करते थे वो संख्या आज बढ़कर प्रतिदिन 1400 से अधिक हो गई है। राज्य की 30 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत विवाहित दंपतियों का पंजीकरण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। बीते एक वर्ष में यूसीसी के अंतर्गत लगभग 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का निस्तारण भी किया जा चुका है। राज्य में ऑनलाइन पोर्टल व्यवस्था तथा 7,500 से अधिक सक्रिय कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से शासन को वास्तव में सीधे जनता के द्वार तक पहुँचा दिया है।
विवाह में धोखाधड़ी करने पर सख्ती का प्रावधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में राज्य सरकार ने यूसीसी में आवश्यक संशोधनों से संबंधित विधेयक पारित किया था, जिसे एक दिन पहले ही राज्यपाल महोदय की स्वीकृति प्राप्त हुई है। जिसके अंतर्गत विवाह के समय यदि अपनी पहचान छिपाने या गलत तथ्य बताने पर ऐसे विवाहों को निरस्त करने का प्रावधान है। इसके साथ ही, विवाह एवं लिव-इन संबंधों में किसी भी प्रकार के बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।
बहु विवाह पर होगी सख्ती
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कुछ मामले बहु विवाह और विवाह विच्छेद से भी संबंधित सामने आए हैं, ऐसे मामलों में अलग से प्रावधान करते हुए, सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी अमेरिका के एक एनजीओ ने उन्हें हेट स्पीच का जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन यदि धर्मांतरण, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ बोलना हेट स्पीच है तो फिर वो फिर अच्छा ही है।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सविता कपूर, सुरेश गड़िया, बृज भूषण गैरोला, सचिव गृह शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, यूसीसी समिति के सदस्य पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह, दून विवि की वीसी प्रो सुरेखा डंगवाल, मनु गौड़, अजय मिश्रा, विशेष सचिव गृह निवेदिता कुकरेती एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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