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चुनाव आयोग के बाहर कांग्रेस नेताओं का धरना, उत्तराखंड में SIR में गड़बड़ी का विरोध – myuttarakhandnews.com

नई दिल्ली; उत्तराखंड में SIR से जुड़े मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने जमकर विरोध किया. गुरुवार को कांग्रेस के कई नेता निर्वाचन आयोग के दफ्तर पहुंचे. कुमारी शैलजा, गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य, गुरदीप सिंह सप्पल और पवन खेड़ा जैसे कई नेताओं ने ECI दफ्तर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि वो उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों को लेकर निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी. ज्ञापन सौंपने से रोके जाने के विरोध में सभी कांग्रेस नेता भारत निर्वाचन आयोग के मेन गेट के बाहर ही जमीन पर बैठ गए और धरना दे दिया.
धरने पर बैठे नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. वो ‘चुनाव आयोग होश में आओ, होश में आओ’, ‘चुनाव आयोग ज्ञापन लो’, ‘लोकतंत्र की हत्यारी ये सरकार नहीं चलेगी’ और ‘संविधान विरोधी ये सरकार नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाते दिखे. निर्वाचन आयोग दफ्तर के बाहर सुरक्षा बलों और पुलिस की भारी तैनाती देखी गई. मेन गेट को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया.
उत्तराखंड कांग्रेस प्रेसिडेंट गणेश गोदियाल ने इस बारे में बात करते हुए ANI से कहा, ‘कुछ समय से हम EC से अपॉइंटमेंट मांग रहे हैं. ताकि राज्य में वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर हो रही गड़बड़ियों को EC के ध्यान में लाया जा सके. हालांकि, हमें पहले अपॉइंटमेंट देने से मना कर दिया गया था और आज सुबह से रिक्वेस्ट करने के बावजूद, हमें अभी तक मिलने का मौका नहीं मिला है. इसलिए, हमारे इंचार्ज की लीडरशिप में, हमने वहां जाकर सीधे अपनी बात रखने का फैसला किया.’
‘लगभग 8 लाख लोग इससे प्रभावित हैं’
वहीं, कांग्रेस MP कुमारी शैलजा ने कहा, ‘उत्तराखंड में बहुत ज्यादा गड़बड़ हो रही है. हम इलेक्शन कमीशन को एक मेमोरेंडम देना चाहते थे. ये हमारा हक है. लेकिन हम पहले भी कई बार यहां आ चुके हैं. हमें ऊपर ले जाया जाता, हम अपना केस रखते, हमारी बात सुनी जाती और बातचीत होती. लेकिन हमारा देश किस तरह की डेमोक्रेसी बन गया है? आज EC ने अपना ही ऑफिस बंद कर लिया है और खुद को अंदर बंद कर लिया है. क्या वो जेल में हैं? ये बहुत अजीब है.
उन्होंने आगे कहा, ‘ये सिर्फ एक कैंडिडेट की बात नहीं है, बल्कि ये उत्तराखंड की पूरी डेमोक्रेसी से जुड़ा सवाल है: कितने लोगों के वोट डिलीट हो रहे हैं, कौन शिकायत कर रहा है, उनका कोई अता-पता क्यों नहीं है और लोगों के नाम कैसे हटाए जा रहे हैं. ये बड़े मुद्दे हैं. लगभग 8 लाख लोग इससे प्रभावित हैं. वहां फ्रॉड हो रहा है.’

Nandni sharma

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