विकासनगर : जौनसार-बावर क्षेत्र अपनी अनोखी परंपराओं और अनूठी संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां समय-समय पर समाज सुधार के लिए सामूहिक फैसले लिए जाते रहे हैं। इसी क्रम में अब खत पट्टी शैली के अंतर्गत आने वाले एक दर्जन से ज्यादा गांवों ने मिलकर कई महत्वपूर्ण सामाजिक निर्णय लिए हैं।
ये बैठक 20 नवंबर को दोहा गांव में आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता गांव के सदर स्याणा (मुखिया) राजेंद्र सिंह ने की। बैठक में मौजूद सभी गांवों के लोगों ने इन नियमों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी है।
शादी और अन्य शुभ कार्य अब सादगी से होंगे
बैठक में तय किया गया कि अब सभी गांवों में होने वाली शादियां और अन्य मांगलिक कार्यक्रम बहुत सादगी से मनाए जाएंगे।महंगे तोहफे न दिए जाएंगे, न लिए जाएंगे।साथ ही कार्यक्रमों में शराब और फास्ट फूड (जैसे चाउमीन, मोमोज) पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।नियम तोड़ने पर एक लाख रुपये जुर्माना लगेगा।उल्लंघन करने वाले परिवार के कार्यक्रमों में गांव के लोग शामिल नहीं होंगे।
महिलाएं पहन सकेंगी केवल तीन गहने
सामाजिक समानता को ध्यान में रखते हुए यह भी तय किया गया कि शादी और रयणी भोज (शादीशुदा महिलाओं का पारंपरिक भोज) में महिलाएं केवल तीन प्रकार के गहने पहनेंगी फूली (नाक की नोज पिन),कानों में झुमके,गले में मंगलसूत्र पहन सकेंगी।यह नियम पहले कंदाड और इंद्रोली गांव में लागू किया गया था, बाद में खारसी गांव ने भी इसे अपनाया। अब खत पट्टी शैली के सभी गांव इसे पालन करेंगे।
बैठक में लिए गए अन्य फैसले
शादी में मामा की ओर से बकरा, आटा और चावल देने की परंपरा जारी रहेगी।विवाहित बेटी की ओर से ससुराल को बकरा देने की प्रथा बंद की जाएगी।रयणी भोज में मिठाई और फल दिए जा सकते हैं।चांदी का सिक्का, ड्राई फ्रूट और महंगे गिफ्ट पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे।
समाज सुधार की निरंतर परंपरा
जौनसार-बावर में सामूहिक फैसलों से समाज में समानता बढ़ाने की पहल पहले भी होती रही है। अक्टूबर में कंदाड गांव में महिलाओं के तीन गहनों वाला नियम बना था, और अब खत पट्टी शैली के सभी गांवों ने इसे व्यापक रूप दे दिया है।
इन नए नियमों का उद्देश्य है—अनावश्यक खर्च कम करना, सामाजिक समानता बढ़ाना और कमजोर परिवारों पर आर्थिक बोझ को खत्म करना।
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