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देहरादून के बड़े बिल्डरों पर कोर्ट का हंटर! करोड़ों लेकर फ्लैट बेचे, फिर मालिकाना हक में कर दी हेराफेरी – myuttarakhandnews.com

देहरादून (डालनवाला)। राजधानी देहरादून में लग्जरी फ्लैट के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी और धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। CJM कोर्ट की जज रिंकी साहनी ने तेग बहादुर रोड स्थित ‘कमल प्रिया ट्रैंक्विल स्पेसेस’ प्रोजेक्ट से जुड़े 6 बिल्डरों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। आरोप है कि बिल्डरों ने फ्लैट खरीददारों से करोड़ों रुपये वसूलने के बाद सुविधाएं छिपाईं, दस्तावेजों में हेराफेरी की और जमीन के मालिकाना हक से भी खेल किया।
करोड़ों चुकाए, बदले में मिला धोखा
शिकायतकर्ता ललित सभरवाल, विनीत बिजल्वाण और श्वेता शर्मा ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट में क्रमशः ₹1.48 करोड़, ₹2.27 करोड़ और ₹1.72 करोड़ का भुगतान किया। बिल्डरों ने जिम, स्विमिंग पूल, मॉड्यूलर किचन और लग्जरी सुविधाओं का झांसा दिया, लेकिन बाद में न तो वादे पूरे किए गए और न ही अधिकार दिए गए।
सेल डीड में किया गया मालिकाना हक का ‘खेल’
कोर्ट में पेश दस्तावेजों के मुताबिक बिल्डरों ने सेल डीड में जमीन के मालिकाना हक (Land Ownership) को जानबूझकर गायब किया, रूफ राइट्स और कॉमन एरिया के अधिकार छिपाए गए, फ्लैट खरीदारों पर नए टावर निर्माण के लिए NOC देने का दबाव बनाया गया ओर इनकार करने पर सेल डीड रोकने और फ्लैट न देने की धमकी दी गई। यह पूरा मामला रेरा (RERA) नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
MDDA सर्टिफिकेट के बाद भी धोखाधड़ी
चौंकाने वाली बात यह है कि MDDA से कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद सेल डीड में हेराफेरी की गई, जिससे साफ है कि पूरा खेल योजनाबद्ध तरीके से किया गया।
पुलिस की भूमिका पर भी सवाल
पीड़ितों ने बताया कि दिसंबर में ही थाना डालनवाला और SSP देहरादून को शिकायत दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद मजबूर होकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही को गंभीर मानते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच के आदेश दिए।
कोर्ट सख्त, बिल्डरों में हड़कंप
CJM कोर्ट के आदेश के बाद बिल्डर लॉबी में हड़कंप मचा हुआ है। माना जा रहा है कि जांच में कई बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं।
फ्लैट खरीदारों के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लैट बुकिंग से पहले सिर्फ विज्ञापनों पर भरोसा न करें। सेल डीड, लैंड ओनरशिप, कॉमन एरिया राइट्स, रूफ राइट्स और RERA रजिस्ट्रेशन की पूरी जांच अनिवार्य रूप से करें।

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pooja Singh

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