हरिद्वार। देश के बड़े शहरों से कोचिंग सेंटरों में हादसों की खबरें लगातार आ रही हैं। कभी जलभराव तो कभी अग्निकांड में छात्र-छात्राएं अपनी जान गंवा रहे हैं। ताजा घटना लखनऊ में हुई है। लेकिन हरिद्वार के कोचिंग सेंटरों की स्थिति भी बाकी शहरों से अच्छी नहीं है। शहर में नामी कोचिंग सेंटरों की संख्या तो हर साल बढ़ रही है। मगर सुर मानकों पर अधिकांश सेंटर फेल नजर आते हैं।
हालात ये हैं कि शहर में बड़े पैमाने पर कोचिंग सेंटर बेसमेंट में चल रहे हैं। ज्यादातर सेंटरों में अग्निसुरक्षा, आपातकालीन निकासी और भवन सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मध्य हरिद्वार में जलभराव का खतरामध्य हरिद्वार में हर साल मानसून सीजन में भारी जलभराव होता है। जबकि कोचिंग सेंटरों की सबसे ज्यादा संख्या भी मध्य हरिद्वार में ही है। रानीपुर मोड़ से लेकर ज्वालापुर, शिवालिक नगर, सिडकुल और बहादराबाद क्षेत्र में कई स्थानों पर बड़े और छोटे कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई संस्थान बहुमंजिला व्यावसायिक भवनों में चल रहे हैं।
कुछ जगहों पर बेसमेंट और संकरे मार्गों वाले भवनों में भी कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। किसी भी आपात स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पिछले साल दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में बारिश के दौरान जलभराव होने से 12 छात्रों की मौत हो गई थी। वहीं, सोमवार को लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 15 छात्रों की जान चली गई। इन घटनाओं ने एक बार फिर देशभर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फायर एनओसी तक नहींकोचिंग संस्थानों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रतिदिन अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कुछ संस्थानों में एक समय में सैकड़ों छात्र मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद कई भवनों में अग्निशमन यंत्र या तो पर्याप्त संख्या में नहीं हैं या उनकी नियमित जांच नहीं कराई जाती। कई स्थानों पर आपातकालीन निकास द्वार, फायर अलार्म सिस्टम और धुआं निकासी की व्यवस्था भी नहीं दिखाई देती।
तेजी से बढ़ रहा व्यवसायधर्मनगरी में पिछले कुछ वर्षों में कोचिंग व्यवसाय तेजी से बढ़ा है। देश के नामी संस्थानों की शाखाएं भी हरिद्वार पहुंच चुकी हैं, लेकिन सुरक्षा के प्रति गंभीरता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है। भवनों के उपयोग, पार्किंग व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्रों की नियमित जांच नहीं होने से जोखिम और बढ़ जाता है। देश में कहीं कोई बड़ा हादसा होने पर अधिकारियों की ओर से सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए जाते हैं। लेकिन कुछ समय बाद आदेश फाइलों में गुम हो जाते हैं।
सुरक्षा ऑडिट कराने की उठी मांगलखनऊ की घटना के बाद हरिद्वार में समस्त कोचिंग सेंटर, कम्पूटर सेंटर, जिम सहित, प्ले स्कूल व बच्चों की एक्टिविटी सेंटरों, स्कूल बसे, माल, मार्ट, होटलों की फायर सेफ्टी प्वाइंट्स की गहनता से जांच की मांग उठ रही है। महानगर व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष सुनील सेठी ने लखनऊ की हृदयविदारक घटना में जान गंवाने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। जिसमें लखनऊ की घटना से सबक लेते हुए हरिद्वार के कोचिंग सेंटरों सहित बच्चों की एक्टिविटी के समस्त सेंटरों की सेफ्टी प्वाइंट की गहनता से जांच करने की मांग की है।
सुनील सेठी ने कहा कि हाइवे सहित मुख्य बाजारों पर आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। बचाव के लिए कुछ प्रभावी उपाय उठाने चाहिए। मांग करने वालो में हरिमोहन भारद्वाज, सुशील कुमार, पंकज सिंह, लाल जी, सौरभ अरोड़ा, राहुल श्रीवास्तव, एसएन तिवारी, राकेश सिंह, अमित शर्मा, आशीष अग्रवाल, सचिन शर्मा, अमित अरोड़ा शामिल रहे।
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