अब रहने लायक नही रहा दून। देश के सबसे प्रदूषित शहरों मे शुमार – पर्वतजन

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना हुआ है, लेकिन इसके साथ ही पर्वतीय राज्य उत्तराखंड का देहरादून भी अब वायु गुणवत्ता के मामले में चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। तापमान में गिरावट और घने कोहरे की मौजूदगी ने दून की हवा को और ज्यादा दूषित बना दिया है। खास तौर पर सुबह और रात के समय हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में दर्ज हो रही है।
आम तौर पर दिल्ली को प्रदूषण का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, लेकिन ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि देहरादून भी अब तेजी से प्रदूषण ग्रस्त शहरों की श्रेणी में शामिल हो रहा है। कभी स्वच्छ हवा के लिए मशहूर रहे इस शहर की पहचान पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कई मौकों पर दून का AQI दिल्ली जैसे महानगरों से भी अधिक दर्ज किया गया है।
AQI ने बढ़ाई चिंता

दून विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 3 दिसंबर की रात देहरादून का एयर क्वालिटी इंडेक्स 210 दर्ज हुआ। वहीं, इससे एक दिन पहले 2 दिसंबर की रात एक्यूआई 300 तक पहुंच गया था, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इसकी तुलना जब अन्य शहरों से की गई, तो प्रयागराज में AQI 130, कानपुर में 114 और पटना में 106 दर्ज हुआ। यानी दून की हवा की गुणवत्ता इन शहरों के मुकाबले काफी अधिक प्रभावित रही।
दून विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजय श्रीधर के अनुसार, भले ही ये स्तर लंबे समय तक स्थिर नहीं रहे, लेकिन इतने ऊंचे आंकड़े खुद यह दर्शाते हैं कि स्थिति सामान्य नहीं है और तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।
प्रदूषण के बढ़ने के प्रमुख कारण
शहर में इन दिनों शादी समारोहों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इन आयोजनों में तंदूर और भारी ईंधन वाले चूल्हों का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है, जिससे धुआं और कण प्रदूषण में तेजी से इज़ाफा हो रहा है। इसी तरह, साल के अंतिम महीनों में पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही और रात के समय लोगों की गतिविधियों में वृद्धि ने भी रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य प्रतिष्ठानों में तंदूर व भट्टियों के उपयोग को बढ़ा दिया है।
इसके साथ ही, देहरादून में कई स्थानों पर लोग अभी भी खुले में कूड़ा जलाने की गलत आदत नहीं छोड़ पाए हैं, जो वायु प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत बनी हुई है। शहर में ट्रैफिक का दबाव और बायोमास जलाने की घटनाएं भी प्रदूषण स्तर को और बढ़ा रही हैं।
सुबह और शाम में AQI क्यों होता है अधिक खराब
विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह और शाम के समय हवा की गति बहुत कम हो जाती है। ठंडे मौसम में हवा का घनत्व बढ़ने से प्रदूषित कण ऊपर उठने के बजाय निचले स्तर पर ही अटके रहते हैं, जिससे AQI तेजी से बढ़ता है।
बारिश न होने से भी बिगड़ा स्तर
नवंबर और दिसंबर के शुरुआती दिनों में बारिश का अभाव भी प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। वर्षा न होने से वातावरण में मौजूद धूल और धुएं के कण नीचे ही बने रहते हैं और साफ नहीं हो पाते, जिसके चलते एयर क्वालिटी और खराब होती जा रही है।
देहरादून की बिगड़ती हवा अब सिर्फ स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं, बल्कि शहर की गिरती पर्यावरणीय स्थिति का संकेत भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

Sapna Rani

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