हल्द्वानी: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां बीमा पॉलिसियों का प्रीमियम बोनस समेत वापस दिलाने का झांसा देकर एक बुजुर्ग से 72 लाख 33 हजार 600 रुपये की ऑनलाइन ठगी कर ली गई. ठगों ने खुद को एनपीसीआई (NPCI) का अधिकारी बताकर कई महीनों तक अलग-अलग चार्ज के नाम पर रकम वसूली. पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, कुमाऊं रेंज रुद्रपुर ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
हल्द्वानी निवासी एक व्यक्ति साइबर ठगों के जाल में फंसकर अपनी जीवनभर की जमा पूंजी गंवा बैठे. पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, कुमाऊं रेंज रुद्रपुर में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि, वर्ष 2024 में उन्होंने खुद और अपने परिवार के सदस्यों के नाम विभिन्न बीमा कंपनियों में पांच बीमा पॉलिसियां खरीदी थीं. उन्होंने पहली किस्त के रूप में करीब 80 हजार रुपए जमा किए थे, लेकिन बाद में आर्थिक कारणों से आगे की प्रीमियम राशि जमा नहीं कर पाए.
पीड़ित के अनुसार, जुलाई 2025 से उन्हें अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार कॉल आने लगे. कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम संदीप शर्मा बताते हुए खुद को एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) में असिस्टेंट मैनेजर एवं फंड ट्रांसफर मैनेजर बताया. उसने दावा किया कि, उनकी पांचों बीमा पॉलिसियों का प्रीमियम और बोनस मिलाकर लगभग एक करोड़ रुपए का रिफंड बनता है, जिसे वह आसानी से उनके खाते में ट्रांसफर करवा सकता है.
ठगों ने विश्वास जीतने के लिए पीड़ित से आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो व्हाट्सएप पर मंगवाए. इसके बाद रिफंड प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस, कैपिटल गेन टैक्स, जीएसटी, आरबीआई प्रोसेसिंग चार्ज, एक राज्य से दूसरे राज्य में भुगतान ट्रांसफर शुल्क और अन्य कई प्रकार के शुल्क बताकर बार-बार रकम जमा कराई. ठग हर बार नए बैंक खातों की जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से भेजते रहे और पीड़ित उनसे मिले निर्देशों के मुताबिक, भुगतान करता रहा.
सुरेंद्र सिंह ने 14 जुलाई 2025 से 6 मई 2026 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और एक्सिस बैंक में मौजूद अपने खातों से कुल 84 ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के माध्यम से 72 लाख 33 हजार 600 रुपए ठगों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में जमा कर दिए. ठग लगातार आश्वासन देते रहे कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद एक करोड़ रुपए का भुगतान उनके खाते में कर दिया जाएगा.
जब लंबे समय तक कोई भुगतान नहीं मिला और ठगों के सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए, तब पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ. इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के साथ उन्होंने तीनों बैंक खातों के स्टेटमेंट, व्हाट्सएप चैट, ठगों द्वारा भेजे गए दस्तावेज और अन्य डिजिटल सबूत भी पुलिस को उपलब्ध कराए हैं.
पीड़ित की तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मामले की जांच शुरू कर दी गई है और बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल सबूत की पड़ताल की जा रही है. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. साइबर ठगी में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे नेटवर्क का पता लगाकर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.-अरुण कुमार, साइबर इंस्पेक्टर-
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि, बीमा पॉलिसी रिफंड, लॉटरी, निवेश या अन्य किसी भी प्रकार के लालच में आकर अनजान व्यक्तियों को अपनी निजी जानकारी या धनराशि न दें. किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस को दें.
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