हल्द्वानी। कृषि उत्पादन मंडी समिति हल्द्वानी द्वारा किसान बाजार में दुकानों के आवंटन को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि आवंटन प्रक्रिया में भारी अनियमितताएँ की गईं और दुकानों को कांग्रेस नेताओं, उनके परिजनों और करीबी रिश्तेदारों में बांटा गया। सूचना के अधिकार (RTI) के दस्तावेजों के आधार पर सामने आए ये खुलासे पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं और नजदीकियों को आवंटन—राजनीतिक दखल के संकेत
शिकायतकर्ता के अनुसार किसान बाजार की 9 दुकानों में से लगभग सभी दुकानें कांग्रेस से जुड़े व्यक्तियों को मिलीं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि—
• अनुसूचित जाति (SC) हेतु आरक्षित दोनों दुकानें—संख्या 31 और 36—कथित रूप से कांग्रेस विधायक और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के रिश्तेदारों/करीबी लोगों को आवंटित की गईं।
इससे यह आशंका और गहराती है कि आवंटन प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप सक्रिय रूप से मौजूद था।
“सिंडिकेट” का खुलासा—एक ही परिवार, जाति और रिश्तेदारों की भागीदारी
RTI दस्तावेजों में सामने आए तथ्यों के अनुसार—
• कई दुकानों पर बोली लगाने वाले आवेदक एक ही परिवार, जाति या आपस में रिश्तेदार थे।
• दुकान संख्या 30 और 32 क्रमशः चंदन सिंह और मदन सिंह को मिलीं, जो सगे भाई हैं और पहले से ही मंडी में आढ़त C-148 के स्वामी हैं।
• दुकान संख्या 34 परमजीत सिंह संटी को मिली, जिनके परिवार को इससे पहले भी दुकान मिली थी, जिसे बाद में ऊँचे दामों पर बेच दिया गया था।
बोली राशि संदिग्ध—सभी दुकानों की कीमत लगभग समान
नौ दुकानों की उच्चतम बोली राशि बेहद संदेहास्पद रूप से एक-दूसरे के समान रही—
₹18.82 लाख से ₹19.10 लाख, अर्थात् केवल ₹28,000 का अंतर।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि दुकानों का वास्तविक बाज़ार मूल्य इससे काफी अधिक है।
इससे संकेत मिलता है कि बोली पूर्व-निर्धारित, प्रबंधित हो सकती थी।
नियमों की अनदेखी—कम प्रतिभागियों के बावजूद टेंडर स्वीकृत
टेंडर नियमावली के अनुसार—
प्रति दुकान कम से कम तीन बोलीदाता होना अनिवार्य है।
लेकिन—
• दुकान संख्या 32 में केवल दो प्रतिभागियों ने बोली लगाई, फिर भी टेंडर खोल दिया गया।
• कई दुकानों में वही “तीन-तीन तयशुदा” बोलीदाता शामिल थे, जो आपसी सांठगांठ की ओर इशारा करते हैं।
90 वर्ष की लीज—सिर्फ ₹500 मासिक शुल्क पर दुकानें!
दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि—
• दुकानों को 90 वर्षों की लीज पर
• मात्र ₹500 प्रति माह के किराये पर आवंटित कर दिया गया।
इतनी कम राशि पर इतनी मूल्यवान दुकानों का आवंटन सरकारी राजस्व पर गंभीर चोट माना जा रहा है।
*कब्जा वितरण राजनीतिक पदभार ग्रहण के बाद*
RTI में यह भी दर्ज है कि दुकानों का कब्जा सितम्बर 2023 से फरवरी 2024 के बीच दिया गया।
यही वह समय था जब अनिल कपूर उर्फ अनिल डब्बू ने उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी परिषद के अध्यक्ष का पद संभाला।
सरकार और प्रशासन पर सवाल
छह-सदस्यीय समिति की मौजूदगी के बावजूद मनमाने तरीके से आवंटन? सूत्रों और आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक किसान बाजार की दुकानों के आवंटन प्रक्रिया के समय हल्द्वानी मंडी समिति के प्रशासक सिटी मजिस्ट्रेट थे, जो समिति के चेयरमैन भी थे। इसके अलावा जिलाधिकारी द्वारा नामित सदस्य, तत्कालीन एसडीएम मनीष कुमार, मंडी सचिव और मंडी परिषद के तीन अधिकारियों को मिलाकर एक छह-सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। इसके बावजूद आवंटन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ उजागर हुई हैं, जिसने समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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