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उत्तराखंड में गर्मी के साथ बढ़ रही जंगलों की आग, पांच दिन में खाक हो गया 41.27 हेक्टेयर फॉरेस्ट – myuttarakhandnews.com

हल्द्वानी। वन विभाग के वनाग्नि नियंत्रण के दावे जंगल की आग में धू-धूकर जल रहे हैं। कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक जंगल की आग में बहुमूल्य वन संपदा जल रही है। पिछले पांच दिनों में प्रदेश में 41.27 हेक्टेयर जंगल जल गए हैं। इस अवधि में कुमाऊं में 9.6 हेक्टेयर और गढ़वाल में 29.37 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है।
पारंपरिक रूप से 15 फरवरी से फायर सीजन मानने वाले वन विभाग के लिए अप्रैल के तीसरे सप्ताह से असल वनाग्नि सत्र शुरू हुआ है। जंगल की आग वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रही है। विभाग ने भी पिछले वर्षों में आग की घटनाओं से सबक नहीं लिया। न तो वन कर्मियों के पास आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन हैं और न सुरक्षा के इंतजाम। पूर्व में गांव-गांव में फायर फाइटर तैयार करने का दावा भी किया गया था, मगर यह दावा धरातल पर नहीं दिखा है।
जंगल की नमी हो गई कमइधर, लगातार पड़ रही धूप ने जंगल की घास, चीड़ की पत्तियां पूरी तरह सूख चुकी हैं। यही नहीं जंगल की नमी भी कम हो गई है। इस वजह से आग का खतरा काफी बढ़ गया है और यह दिख भी रहा है। 19 अप्रैल से 23 अप्रैल के बीच देखें तो प्रदेश में जंगल की आग में एकाएक बढ़ोतरी हुई है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इन पांच दिनों में प्रदेश में 66 जगहों पर वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें गढ़वाल में 48 जगहों पर और कुमाऊं में 13 जगहों पर जंगल जले। इसी तरह वन्य जीवों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले वन क्षेत्रों में भी पांच जगह वनाग्नि रिपोर्ट की गई, जिसमें 2.3 हेक्टेयर जंगल खाक हुआ।
उधर, गढ़वाल में पौड़ी जिले में 13 जगहों पर जंगल जल रहे हैं। इनमें कालागढ़ टाइगर रिजर्व की बिजोरागाड बीट के जंगल भी जलते दिखे, जो बाघों के लिए सुरक्षित वन क्षेत्र है।इधर, 20 अप्रैल को नैनीताल के गेठिया क्षेत्र में आलूखेत की पहाड़ी जंगल की आग की चपेट में आ गई थी, जिस पर 30 घंटे बाद काबू पाया जा सका। इसी तरह 19 अप्रैल को उत्तरकाशी की मुखेम रेंज में तीन जगहों पर आग के चलते वन संपदा को नुकसान पहुंचा।
इधर, 19 अप्रैल को नैनीताल के भवाली में ल्वेशाल डोब से सटे जंगल, गरमपानी में बेतालघाट से सटे कोसी व विनायक में बांज, बुरांश और चीड़ के पेड़ जलकर राख हो गए।वहीं चंपावत के बाराकोट विकासखंड में डोबाभागू, खाली और तड़ाग के जंगल धधके।
फायर सीजन में वनाग्नि के आंकड़ेमंडल – वनाग्नि की घटनाएं प्रभावित क्षेत्रगढ़वाल – 141 79.72 हेक्टेयरकुमाऊं – 15 12.1 हेक्टेयरवन्यजीव सुरक्षित क्षेत्र – 21 12.55 हेक्टेयरकुल 177 104.37 हेक्टेयर(आंकड़े 15 फरवरी 2026 से 23 अप्रैल 2026 तक के हैं)

Nandni sharma

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