उत्तराखंड पुलिस में सब-इंस्पेक्टरों की कमी पर मानवाधिकार आयोग सख्त – पर्वतजन

फील्ड स्तर पर SI कैडर की न्यूनतम वृद्धि से आम नागरिकों के अधिकार प्रभावित : आयोग ने DGP को दिए जांच के निर्देश
देहरादून:उत्तराखंड पुलिस की संरचना में एक गंभीर असंतुलन को लेकर मानवाधिकार आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है। फील्ड स्तर पर कार्यरत सब-इंस्पेक्टर (SI) कैडर में सबसे कम प्रतिशत वृद्धि को आम नागरिकों के मानवाधिकारों से जोड़ते हुए आयोग ने इसे चिंताजनक करार दिया है।
जनहित में दायर शिकायत पर कार्रवाई करते हुए उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के सदस्य आईपीएस राम सिंह मीना ने दिनांक: 27.01.2026 डीजीपी को नोटिस जारी कर आदेशित किया गया।

आदेश
शिकायतकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी ने उत्तराखण्ड राज्य पुलिस बल में फील्ड सतर पर कार्यरत सब-इंस्पेक्टर के पदों में सबसे कम प्रतिशत भर्ती होने तथा फील्ड सतर पर एस०आई० कैडर को पर्याप्त संख्या में सुदृढ़ करने के संबंध में शिकायत प्रस्तुत की है।
शिकायत की प्रति पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड को प्रेषित कर दी जाये कि वे इस संबंध विधिनुसार व नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करें।
RTI से सामने आया चौंकाने वाला सच
आरटीआई,मानवाधिकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता भूपेन्द्र कुमार लक्ष्मी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001 से 2025 के बीच—
IPS अधिकारियों की संख्या 19 से बढ़कर 67 (लगभग 252% वृद्धि)
PPS अधिकारियों की संख्या 38 से बढ़कर 111 (लगभग 192% वृद्धि)
CO पद 31 से बढ़कर 72 (लगभग 132% वृद्धि)
इंस्पेक्टर 55 से बढ़कर 268 (लगभग 387% वृद्धि)
जबकि सब-इंस्पेक्टर (SI) की संख्या मात्र 612 से बढ़कर 1134 हुई — यानी केवल 85% वृद्धि, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है।
न्याय प्रणाली की रीढ़ है SI कैडर
शिकायत में यह भी स्पष्ट किया गया कि—
FIR दर्ज करना
विवेचना करना
पीड़ित से प्रत्यक्ष संपर्क
चार्जशीट दाखिल करना
थाना स्तर पर कानून-व्यवस्था का वास्तविक संचालन
ये सभी जिम्मेदारियाँ मुख्यतः सब-इंस्पेक्टर के कंधों पर होती हैं। ऐसे में इस कैडर की न्यूनतम वृद्धि से विवेचनाओं में देरी, थानों पर अत्यधिक कार्यभार, और पीड़ितों को समय पर न्याय न मिल पाने जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो रही हैं, जो सीधे-सीधे जीवन, स्वतंत्रता और न्याय के अधिकार का उल्लंघन हैं।
मानवाधिकार आयोग ने शिकायत को गंभीर मानते हुए इसकी प्रति पुलिस महानिदेशक को भेज दी है और अपेक्षा जताई है कि राज्य पुलिस बल में फील्ड स्तर पर SI कैडर को पर्याप्त रूप से सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
जनहित में उठी मजबूत आवाज
यह शिकायत किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों, न्याय व्यवस्था की मजबूती और पुलिसिंग की गुणवत्ता से जुड़ा मामला है। मानवाधिकार आयोग की यह पहल न केवल पुलिस व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि संरचनात्मक असंतुलन भी मानवाधिकार का विषय हो सकता है।

Sapna Rani

Recent Posts

उत्तराखंड में मौसम बिगड़ने की चेतावनी, नैनीताल-पिथौरागढ़ समेत 5 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, ट्रेकिंग पर सख्ती – myuttarakhandnews.com

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन के अधिकारियों को…

8 minutes ago

DM reviews preparations for Mussoorie Winterline Carnival

my uttarakhand news Bureau Dehradun, 29 Oct: The district administration has begun preparations for the…

10 minutes ago

Hearing on Urmila Sanawar’s bail deferred, court to hear matter on 31 Oct

By Arun Pratap SinghGarhwal Post Bureau Haridwar, 29 Oct: Actress Urmila Sanawar will continue to…

22 minutes ago

STF busts illegal telecom exchange in Kashipur

my uttarakhand news Bureau Kashipur (US Nagar), 29 Oct: In a major crackdown on cyber-crime…

33 minutes ago

U’khand emerging as major literary hub: Dhami

CM participates in literary festival at Lekhak Gaon my uttarakhand news Bureau Dehradun, 29 Oct:…

44 minutes ago

दीपावली से पहले धामी सरकार का बड़ा फैसला, शहरी निकायों को वेतन-पेंशन के लिए 328 करोड़ जारी – myuttarakhandnews.com

दीपावली के अवसर पर शहरी निकायों के कर्मचारियों के वेतन और वित्तीय देनदारियों के भुगतान…

50 minutes ago