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उत्तराखंड में आफत की बारिश, अनुमानित ₹1 हजार करोड़ का नुकसान, सबसे ज्यादा सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त


Uttarakhand faces heavy rains, estimated loss of ₹1 thousand crore, most roads and bridges damaged

देहरादून: उत्तराखंड में इस साल आफत की बारिश ने भारी तबाही मचाई. भारी बारिश की वजह से न सिर्फ प्रदेश के तमाम क्षेत्रों में आपदा जैसी स्थिति बन गई, बल्कि मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति भी देखी गई. आपदा प्रबंधन विभाग प्रदेश में भारी बारिश की वजह से हुए नुकसान का आकलन कर रहा है. फिलहाल जो फौरी तौर पर अनुमान लगाया गया है, उसके अनुसार इस मॉनसून सीजन के दौरान अनुमानित 1000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है. वहीं, सबसे अधिक लोक निर्माण विभाग को इस बारिश की वजह से करीब 350 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. यानी सड़कों और पुलों को पहले की स्थिति में लाने के लिए 350 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे.
उत्तराखंड में हर साल मॉनसून सीजन के दौरान जान माल का काफी अधिक नुकसान होता है. इस साल भी उत्तराखंड में कई बड़ी प्राकृतिक आपदाएं घटित हुईं. जिसने शासन प्रशासन की चुनौतियों को और अधिक बढ़ा दिया. आपका सीजन के दौरान तमाम विभागों को काफी नुकसान पहुंचा है. जिसमें लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, ऊर्जा विभाग, पेयजल विभाग, राजस्व विभाग, शिक्षा विभाग समेत अन्य विभाग शामिल हैं. इन सभी विभागों को इस आफत की बारिश की वजह से काफी नुकसान पहुंचा है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. यही वजह है कि आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी विभागों से नुकसान का आकलन करते हुए रिपोर्ट मांगी थी.
उत्तराखंड में आफत की बारिशहर्षिल में अल्टरनेटिव रास्ता निकालने की तैयारी: बारिश की वजह से इस साल काफी नुकसान हुआ है. प्रदेश के तमाम क्षेत्रों में सड़कों को काफी नुकसान पहुंचा है. गंगोत्री धाम जाने वाला मार्ग अभी भी बाधित है. हर्षिल के पास सड़क करीब 150 मीटर अभी भी पानी के अंदर है. जिसके चलते मशीन क्रॉस नहीं हो पा रही है. इसके तहत 28 अगस्त को पीडब्लूडी की एक टीम मौके पर भेजी गई है. दरअसल, मुख्य सचिव ने इस बाबत निर्देश दिए थे कि बीआरओ के साथ ही पीडब्ल्यूडी भी अपना काम करे. साथ ही अगर कोई अल्टरनेटिव रास्ता निकलता है, तो उस पर काम शुरू किया जाए. ऐसे में 28 अगस्त की शाम तक टीम मौके पर पहुंच जाएगी, जो वैकल्पिक मार्ग पर काम करेगी.
स्यानाचट्टी की झील ने बढ़ाई परेशानी: यमुनोत्री धाम जाने वाले सड़क मार्ग पर स्यानाचट्टी के समीप नाले से मलबा आ गया था, जिससे चलते आर्टिफिशियल झील बन गई थी. हालांकि, उसमें पहले पानी निकासी के लिए रास्ता बनाया गया था, लेकिन दोबारा से फिर से झील की स्थिति बन गई है. जिसके चलते वहां पर भी समस्या बनी हुई है, क्योंकि मलबा लगातार आ रहा है. यही कारण है कि पीडब्ल्यूडी वहां पर काम नहीं कर पा रहा है.
5 अगस्त को धराली में आपदा की वजह से गंगोत्री मार्ग बंदगंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा मार्ग बना चुनौती: बदरीनाथ हाईवे भी भूस्खलन के कारण बार-बार बाधित हो रहा है, लेकिन कुछ समय बाद ही यातायात को सुचारु कर दिया जाता है. इसी तरह केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग भी खुला हुआ है. ऐसे में लोक निर्माण विभाग प्रदेश के सभी मार्गों को खुले रखने पर जोर दे रहा है. लेकिन अभी भी यमुनोत्री और गंगोत्री यात्रा मार्ग पर चुनौती बनी हुई है.
लोनिवि को 350 करोड़ का नुकसान: वहीं, लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे ने कहा कि इस मॉनसून सीजन के दौरान अभी तक अनुमानित 350 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, क्योंकि क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों को पूर्व की स्थिति में लाने के लिए 350 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे. साथ ही कहा कि वर्तमान समय में कोई भी पुल जर्जर हालत में नहीं है. हालांकि, मॉनसून की वजह से दो-तीन जगह पर पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जहां पर नए पुलों का निर्माण किया जाएगा. फिलहाल इन जगहों पर बैली ब्रिज लगाया गया है. मॉनसून सीजन के बाद दोबारा से असेसमेंट किया जाएगा कि इस बारिश की वजह से कितने पुलों को नुकसान पहुंचा है और पुलों पर किस लेवल का ट्रैफिक रखना है.
कुल 1000 करोड़ का नुकसान: उत्तराखंड में इस मॉनसून सीजन के दौरान अभी तक अनुमानित 1000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है. ऐसे में तमाम विभागों ने नुकसान का आकलन करते हुए प्रस्ताव आपदा प्रबंधन विभाग को भेज दिया है. नुकसान पर आकलन के सवाल पर आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि भारत सरकार की ओर से गठित टीम जल्द ही उत्तराखंड के आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचेगी. फिलहाल आपदा प्रबंधन विभाग प्रदेश में हुए नुकसान का मेमोरेंडम तैयार कर रही है. जिसे भारत सरकार को भेजा जाएगा. इसके बाद भारत सरकार की टीम प्रभावित क्षेत्रों में आकर नुकसान का अपने स्तर से आकलन करेगी.
विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस साल भारी बारिश की वजह से राज्य को काफी नुकसान हुआ है. जिसकी भरपाई के लिए केंद्र सरकार से प्रयास किया जाएगा. इस दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव आनंद वर्धन के स्तर से भी समीक्षा की जा रही है. फिलहाल इस आपदा की वजह से विभागवार जो नुकसान हुआ है, उसकी रिपोर्ट विभागों से मांगी गई थी. ऐसे में अधिकांश विभागों की ओर से आपदा प्रबंधन विभाग को रिपोर्ट प्राप्त हो गई है. फिलहाल, आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से विभागों के नुकसान रिपोर्ट को कंपाइल किया जा रहा है. जिसके बाद नुकसान का मेमोरेंडम भारत सरकार को भेजा जाएगा.

Nandni sharma

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