कैंसर की रोकथाम और शीघ्र पहचान के लिए इन्दिरेश अस्पताल की नई पहल –

 
देहरादून। उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में भोजन नली (इसोफेगस) के कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने इसके कारणों और जोखिम कारकों पर व्यापक वैज्ञानिक शोध शुरू करने का निर्णय लिया है। शोध के माध्यम से कैंसर के वास्तविक कारणों की पहचान कर रोकथाम, शीघ्र जांच, आधुनिक उपचार और जन-जागरूकता की प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी।
अस्पताल के कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार गर्ग ने बताया कि उत्तराखण्ड के विभिन्न पर्वतीय जिलों से बड़ी संख्या में इसोफेगस कैंसर के मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। अब तक कई मरीजों का सर्जरी, कीमोथेरेपी तथा दूरबीन (मिनिमली इनवेसिव इसोफेगेक्टॉमी) तकनीक से सफल उपचार किया जा चुका है। कई मरीज उपचार के बाद पांच वर्ष से अधिक समय से स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
शोध के दौरान तम्बाकू, धूम्रपान, शराब, अत्यधिक गर्म चाय व भोजन, फल-सब्जियों की कमी, पोषण असंतुलन, मोटापा, एसिड रिफ्लक्स, घरों के भीतर धुएं का संपर्क, पेयजल की गुणवत्ता तथा पर्यावरणीय परिस्थितियों सहित सभी संभावित जोखिम कारकों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। किसी एक कारण को जिम्मेदार मानने के बजाय सभी कारकों का प्रमाण-आधारित विश्लेषण किया जाएगा।
अस्पताल में इस बीमारी की जांच के लिए अपर जीआई एंडोस्कोपी, बायोप्सी, पैथोलॉजी, सीटी स्कैन सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। मरीज की बीमारी की अवस्था और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है। कीमोथेरेपी, ओपन एवं दूरबीन विधि से कैंसर सर्जरी, गहन चिकित्सा, दर्द प्रबंधन, पोषण सहायता, फिजियोथेरेपी और नियमित फॉलो-अप जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
डॉ. गर्ग ने बताया कि भोजन नली का कैंसर शुरुआती अवस्था में अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों के विकसित होता है। यदि निगलने में कठिनाई, भोजन अटकना, लगातार वजन घटना, छाती में दर्द या जलन, खांसी अथवा आवाज में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर एंडोस्कोपी करानी चाहिए। समय पर पहचान होने पर इस कैंसर का सफल उपचार संभव है।
उन्होंने बताया कि शोध में मरीजों की आयु, निवास क्षेत्र, खान-पान, तम्बाकू व शराब सेवन, पोषण, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, पर्यावरणीय संपर्क, बीमारी की अवस्था, उपचार और दीर्घकालिक परिणामों का भी अध्ययन किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अन्य चिकित्सा एवं शोध संस्थानों का सहयोग भी लिया जाएगा।
अस्पताल का उद्देश्य केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध के आधार पर पहाड़ी क्षेत्रों में भोजन नली के कैंसर की रोकथाम, उच्च जोखिम वाले लोगों की समय पर पहचान, जन-जागरूकता और प्रभावी स्वास्थ्य नीति तैयार करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देना है।
 

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