उत्तराखंड में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई जल जीवन मिशन योजना अब अपने निर्णायक चरण में आर्थिक संकट से जूझ रही है। 90:10 के वित्तीय साझेदारी मॉडल पर चल रही इस महत्वाकांक्षी योजना में राज्य सरकार ने तय हिस्से से कहीं अधिक राशि खर्च कर दी है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अब तक हजारों करोड़ रुपये जारी नहीं हो पाए हैं। नतीजा यह है कि योजना से जुड़े ठेकेदारों का भुगतान लंबित है और काम की गति पर असर पड़ रहा है।
राज्य में जून 2026 तक योजना को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जल जीवन मिशन कार्यालय की ओर से लगभग 60 प्रतिशत कार्य पहले ही पूरा कराया जा चुका है, मगर किए गए कार्यों की पेमेंट रुकी हुई है। कारण साफ है—केंद्र से आने वाले फंड की रफ्तार बेहद धीमी है। मौजूदा हालात में प्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार से धनराशि जारी करने की मांग कर रही है।
इसी सिलसिले में सिंचाई एवं जलागम मंत्री सतपाल महाराज हाल ही में दिल्ली पहुंचे थे। वहां उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, पंचायती राज मंत्री सहित अन्य राज्यों के सिंचाई मंत्रियों के साथ बैठक कर उत्तराखंड की स्थिति से अवगत कराया। मंत्री सतपाल महाराज ने स्पष्ट किया कि राज्य में बड़े पैमाने पर काम पूरा किया जा चुका है, लेकिन केंद्रांश न मिलने के कारण भुगतान अटका हुआ है। उन्होंने कहा कि जैसे ही केंद्र सरकार फंड जारी करेगी, ठेकेदारों की देनदारी तुरंत चुकाई जाएगी। मंत्री ने यह भी बताया कि ऐसी समस्या केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी जल जीवन मिशन के तहत यही हालात बने हुए हैं।
जल जीवन मिशन के निदेशक विशाल मिश्रा ने भी फंड को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उनके अनुसार, राज्य सरकार अपने हिस्से से अधिक खर्च कर चुकी है और लगातार केंद्र के साथ पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योजना को जमीन पर उतारने में तेजी दिखाई गई है और अब पूरा फोकस बजट रिलीज कराने पर है। जैसे ही केंद्र से धनराशि प्राप्त होगी, लंबित भुगतान कर योजना को अंतिम चरण में पूरा कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की शुरुआत की थी। उत्तराखंड में इस योजना के तहत कुल 16,555 परियोजनाओं के लिए 9,426.05 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसमें केंद्र सरकार को 8,483.44 करोड़ और राज्य सरकार को 942.60 करोड़ रुपये खर्च करने थे। अब तक 15,459 परियोजनाओं पर कार्य हो चुका है, जबकि 1,096 परियोजनाएं अभी शेष हैं।
वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो योजना के अंतर्गत अब तक कुल 6,634.05 करोड़ रुपये के कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसमें राज्य सरकार की ओर से 1,260.68 करोड़ और केंद्र सरकार की ओर से 5,193.75 करोड़ रुपये दिए गए हैं। केंद्र से मिलने वाले धन की प्रतीक्षा में उत्तराखंड सरकार ने अतिरिक्त 683.59 करोड़ रुपये अपने स्तर पर खर्च किए हैं। इसके बावजूद भारत सरकार से अभी भी 3,289.69 करोड़ रुपये जारी होना बाकी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जल जीवन मिशन के माध्यम से अब तक 9,507 गांवों को नल से जल आपूर्ति से जोड़ा जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का 63.47 प्रतिशत है। हालांकि, अगर केंद्र से समय पर फंड जारी नहीं हुआ, तो जून 2026 की समयसीमा को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
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