
हरिद्वार: धर्मनगरी नाम से प्रचलित हरिद्वार शहर में पूरे साल श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहता है. हर दिन हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा, गंगा आरती और शक्तिपीठ, सिद्धपीठ देवी के मंदिरों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं के लिहाज से हरिद्वार शहर आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है. खास बात है कि हरिद्वार में साल 2027 में अर्धकुंभ मेले का आयोजन होने जा रहा है. लेकिन वर्तमान में हरिद्वार शहर की सड़कों की स्थिति दयनीय हो गई है. गजब की बात है शहर के 10 किमी के दायरे में लगभग 4 आईएएस, 4 से अधिक पीसीएस और एक कैबिनेट मंत्री भी रहते हैं.
हरिद्वार शहर का हाल सीवेज लाइन डालने के बाद बीते 5 महीने से इतने खराब है कि शायद खुद ही शहर अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है. ये हाल तब है जब चारधाम यात्रा शुरू होने में अब मात्र 10 दिन शेष है. लेकिन शहर की सड़कों, गलियों और प्रमुख मार्गों की हालत ऐसी है कि आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
हरिद्वार की प्रमुख सड़कें बदहालजमीनी हकीकत यह है कि जहां एक तरफ सरकार हरिद्वार में भक्तों को मंदिरों के दर्शन के लिए रोपवे की सेवा देने पर विचार कर रही है. वहीं लोगो का फलहाल पैदल चलना दुश्वार हो रहा है. जगह-जगह खुदी सड़कें, कीचड़, गड्ढे और अधूरे काम यह साफ दिखाते हैं कि तैयारियां अभी भी अधूरी हैं.
मुख्य सड़कों की हालत बिगड़ी हुईमनसा देवी मार्ग की हालत खराब, 4 महीने से खुदी पड़ी सड़क: शहर के प्रमुख धार्मिक मार्गों में शामिल मनसा देवी मंदिर जाने वाला मार्ग इन दिनों बदहाली की कहानी बयां कर रहा है. यहां करीब चार महीने पहले सीवर लाइन का काम शुरू हुआ था. लेकिन उसके बाद सड़क को सही तरीके से ठीक नहीं किया गया. नतीजा यह है कि पूरा रास्ता खुदा पड़ा है. कहीं कीचड़ है तो कहीं बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं.
महीनों से खुदी पड़ी रोडस्थानीय लोगों का कहना है कि, रोजाना इस रास्ते से गुजरना मुश्किल हो गया है. जबकि श्रद्धालुओं के लिए भी यह मार्ग काफी अहम है. चारधाम यात्रा से पहले इस मार्ग की ऐसी हालत प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े करती है. लोगों का कहना है कि रोजाना यहां लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं. गड्ढों के कारण ई-रिक्शा पलट रही है. लोग चोटिल हो रहे हैं. तीन दिनों की बारिश में तो हालात और भी बदतर हो गए.
हरिद्वार की ऐसी सड़कों पर यात्रा कर रहे लोगओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में एक साल से सड़क का इंतजार: हरिद्वार के ओल्ड इंडस्ट्रियल इलाके में भी हालात खराब हैं. यहां भी सीवर के बाद सड़क पिछले 10 महीने से नहीं बनी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग एक साल से वे सड़क की समस्या झेल रहे हैं कई जगहों पर सड़क पूरी तरह टूट चुकी है या फिर बनी ही नहीं है. जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है.
हरिद्वार की प्रमुख सड़कों का हाल खराबवाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और बरसात के दौरान हालात और भी खराब हो जाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है. इस रास्ते में बड़े-बड़े मालवाहक वाहन चलते हैं.
इन सड़कों पर वाहन चलाना बेहद खतरे भराहर की पैड़ी जाने वाला मार्ग बदहाल: शहर की सबसे प्रमुख और पवित्र स्थल हर की पैड़ी जाने वाली सड़क की हालत इतनी बुरी है कि यहां भी सीवर लाइन डालने के बाद सड़क नहीं बनी. ये वो मार्ग है जहां से रोजाना हजारों भक्त गुजरते हैं और गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं. सड़क पर कीचड़, गड्ढे और टूटी सड़क के कारण चलना तक मुश्किल हो रहा है. खासकर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह रास्ता खतरनाक साबित हो रहा है. स्थानीय लोगों का व्यापार भी इससे प्रभावित हो रहा है. चारधाम यात्रा के दौरान जब श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ेगी, तब इन रास्तों पर दबाव और बढ़ेगा. इससे हालात और बिगड़ सकते हैं.
खुदी हुई हैं हरिद्वार की प्रमुख सड़केंशांतिकुंज जाने वाला पैदल मार्ग भी जर्जर: कुछ ऐसा ही हाल हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थान शांतिकुंज के लिए फ्लाईओवर के नीचे से जाने वाले मार्ग का भी है. पिछले करीब चार महीनों से इस रास्ते की हालत खराब बनी हुई है. जगह-जगह टूटे हुए हिस्से, कीचड़ और गड्ढे धूल के कारण पैदल चलना मुश्किल हो गया है. यह मार्ग श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. लेकिन इसके बावजूद इसकी मरम्मत को लेकर कोई ठोस कदम उठाए नहीं जा रहे हैं. रोजाना स्थानीय लोग आवाज तो उठा रहे हैं, लेकिन कार्यदायी संस्था आखिरकार क्यों इस समस्या का समाधान नहीं कर पा रही है? ये बड़ा सवाल है.
