मेदांता गुरुग्राम ने ‘ब्रेन पेसमेकर’ सर्जरी से न्यूरोलॉजिकल उपचार में बढ़ाई नई उम्मीद – my uttarakhand news

 
डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) तकनीक पार्किंसंस, डिस्टोनिया, मिर्गी और गंभीर ओसीडी मरीजों के लिए बनी राहत का माध्यम
देहरादून,  न्यूरोलॉजिकल विकार आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुके हैं और अब विकलांगता का एक बड़ा कारण बन रहे हैं। भारत में भी इन बीमारियों का योगदान कुल रोग भार का लगभग 10 प्रतिशत माना जाता है। ऐसे समय में गुरुग्राम स्थित मेदांता – द मेडिसिटी ने उन्नत डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) तकनीक के माध्यम से न्यूरोलॉजिकल उपचार के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस), जिसे आमतौर पर ‘ब्रेन पेसमेकर’ सर्जरी कहा जाता है, पार्किंसंस रोग, डिस्टोनिया, रिफ्रैक्टरी मिर्गी, आवश्यक कंपकंपी तथा गंभीर जुनूनी-बाध्यकारी विकार (ओसीडी) जैसी जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित मरीजों को राहत प्रदान कर रही है।
गुरुग्राम स्थित मेदांता को वर्ष 2026 में न्यूजवीक द्वारा भारत के श्रेष्ठतम अस्पतालों में शामिल किया गया। अस्पताल का न्यूरोसाइंसेज संस्थान आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सा के संयोजन से मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध करा रहा है।
मेदांता के न्यूरोसाइंसेज संस्थान में न्यूरोसर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अनिर्बन दीप बनर्जी के नेतृत्व में डीबीएस प्रक्रिया अत्याधुनिक इमेजिंग तकनीकों के माध्यम से अत्यधिक सटीक मस्तिष्क लक्ष्यीकरण पर आधारित है। इस प्रक्रिया में डायरेक्शनल लीड्स, मल्टी-डायमेंशनल न्यूरोमॉड्यूलेशन और रियल-टाइम ब्रेन-सेंसिंग बायोमार्कर फीडबैक जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे मरीज के लक्षणों के अनुसार स्टिमुलेशन को अनुकूलित किया जा सकता है।
डॉ. बनर्जी ने कहा कि “ब्रेन पेसमेकर सर्जरी की सफलता उसकी सटीकता और परिशुद्धता में निहित है। डीबीएस तकनीक न्यूरोलॉजिकल रोगों से जुड़े लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर मरीजों को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करती है। जब दवाएं और पारंपरिक उपचार पर्याप्त साबित नहीं होते, तब यह तकनीक मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार ला सकती है।”
उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ दशक में उन्होंने 300 से अधिक डीबीएस सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। उनकी विशेषज्ञता और बेहतर परिणामों ने उन्हें भारत में डीबीएस सर्जरी के क्षेत्र के अग्रणी न्यूरोसर्जनों में स्थापित किया है।
मेदांता का डीबीएस कार्यक्रम केवल सर्जरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एआई-आधारित मस्तिष्क लक्ष्य निर्धारण और रिमोट प्रोग्रामिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। इससे मरीजों को उपचार के बाद भी व्यक्तिगत और प्रभावी देखभाल मिल पाती है। अस्पताल का मानना है कि इन तकनीकी नवाचारों से गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकारों से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों को नई उम्मीद मिली है।

pooja Singh

Share
Published by
pooja Singh

Recent Posts

कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे- जिलाधिकारी

जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी ने सहसपुर विधानसभा क्षेत्र के पोलिंग बूथों का निरीक्षण कर एसआईआर आपत्ति…

1 minute ago

उत्तराखंड में कुदरत का कहर: उफान पर गंगा और अलकनंदा, 132 सड़कें बंद, 5 जिलों में येलो अलर्ट जारी

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की प्रचंड बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।…

22 minutes ago

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित हुई वन भूमि हस्तांतरण की बैठक

जिलाधिकारी ने लंबित प्रकरणों में तेजी, समयबद्ध फॉलोअप और विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने के दिए…

43 minutes ago

देवप्रयाग-पौड़ी मार्ग पर दर्दनाक हादसा, 250 मीटर गहरी खाई में गिरी बोलेरो, 5 की मौत

एक गंभीर घायल टिहरी। टिहरी जिले के देवप्रयाग-पौड़ी मार्ग पर एक दर्दनाक सड़क हादसे में…

1 hour ago

उत्तराखंड में ITI होंगे अपग्रेड, उद्योगों की जरूरत के मुताबिक मिलेगा कौशल प्रशिक्षण

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कौशल विकास एवं रोजगार से संबंधित योजनाओं की समीक्षा की …

1 hour ago