मानसून के बीच आपदा से निपटने की तैयारी, 66 स्थानों पर होगी मॉक ड्रिल –

 
यूएसडीएमए में टेबल टॉप एक्सरसाइज के जरिए अंतिम तैयारियों की समीक्षा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे निरीक्षण
देहरादून। मानसून के आगमन के साथ संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उत्तराखंड सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में 2 जुलाई को राज्य के सभी 13 जनपदों में अब तक की सबसे व्यापक राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस अभ्यास के तहत 66 स्थानों पर राहत एवं बचाव कार्यों का पूर्वाभ्यास किया जाएगा, जिनमें अधिकांश स्थान पहली बार शामिल किए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं मॉक ड्रिल का निरीक्षण करेंगे।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित कर अंतिम तैयारियों की समीक्षा की गई। इस दौरान सभी जिलों और विभिन्न रेखीय विभागों की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली, आपसी समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता और राहत-बचाव कार्यों की कार्ययोजना का परीक्षण किया गया।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल अभ्यास करना नहीं, बल्कि वास्तविक आपदा की स्थिति में विभागों की तत्परता, त्वरित निर्णय क्षमता, संसाधनों के बेहतर उपयोग और समन्वित प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि पूर्व तैयारी ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की सबसे मजबूत आधारशिला है और इससे जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अभ्यास के दौरान अतिवृष्टि, बाढ़, भूस्खलन, जलभराव और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी संभावित परिस्थितियों में विभिन्न विभागों की कार्रवाई का परीक्षण किया गया। राहत एवं बचाव कार्यों में गोताखोरों, जल पुलिस, जेसीबी, बोट, राफ्ट और अन्य आधुनिक उपकरणों के उपयोग तथा राहत शिविरों में आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) डीआईजी राजकुमार नेगी ने जिलों को मॉक ड्रिल के संचालन संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
30 जून को उत्तराखंड पहुंचा मानसून
मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. रोहित थपलियाल ने बताया कि 30 जून को मानसून ने उत्तराखंड में दस्तक दे दी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। जून माह में राज्य में 83 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 132 मिमी है।
आधुनिक राहत उपकरणों का प्रदर्शन
टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अग्निशमन विभाग ने आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई। प्रदर्शनी में सीबीआरएनई आपदाओं में उपयोग होने वाले विशेष उपकरण, डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन और सोनार सिस्टम जैसे अत्याधुनिक संसाधनों का प्रदर्शन किया गया। इन उपकरणों का अवलोकन मुख्यमंत्री भी मॉक ड्रिल के दौरान करेंगे।
‘सचेत’ और ‘भूदेव’ ऐप का शत-प्रतिशत उपयोग
एसडीआरएफ ने यूएसडीएमए के ‘सचेत’ और ‘भूदेव’ ऐप डाउनलोड अभियान में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है। एसडीआरएफ के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने दोनों ऐप अपने मोबाइल में डाउनलोड कर लिए हैं। सचिव विनोद कुमार सुमन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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