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महीना 31 का, तबाही 3 दिन की, जख्म उम्र भर… उत्तराखंड में अगस्त का घाव, मलबे में दबी सिसकियां – myuttarakhandnews.com

देहारदूनः मानसून हर साल आता है, लेकिन 2025 का अगस्त… उत्तराखंड के लिए सिर्फ मौसम नहीं, मातम बनकर आया. जून और जुलाई में जहां पूरे राज्य में 35 जानें गई थीं, वहीं सिर्फ अगस्त महीने में 136 लोगों की मौत हुई. 1700 से ज़्यादा घर उजड़ गए. कहीं मलबे ने बस्तियों को निगल लिया, तो कहीं लोग अपनों की लाशें तक नहीं देख पाए.
5 अगस्त: धराली में जिंदगी चंद सेकंड में दफ्न हो गईउत्तरकाशी का धराली, जहां कभी सेब की मीठी खुशबू और राजमा की लहलहाती फसलें पहाड़ों को संवारती थीं. वहां अब सिर्फ मलबा पसरा है. पांच अगस्त को खीर गंगा में आई भीषण बाढ़ को सिर्फ कुछ सेकंड लगे और धराली 50 फीट ऊंचे मलबे में समा गया. 112 मकान, 73 दुकानें और होटल सब कुछ मिट्टी हो गया. अब तक सिर्फ दो शव मिल सके हैं. 67 लोग आज भी लापता हैं, जिनमें से नेपाली मूल के 25 मजदूर भी शामिल हैं. इंसान तो इंसान 235 मवेशी भी इस सैलाब में बह गए. राजमा की वो ज़मीन जो देशभर में मशहूर थी. अब पहचान खो चुकी है. सेब के बागान की जगह अब रेत ओर बोल्डर का रेगिस्तान बन गया है.
पेड़ों पर सड़ रहे सेबदूसरी ओर उत्तरकाशी की रवांई घाटी में किसान लाचार खड़े हैं. सड़के ध्वस्त हो जाने के कारण सेब पेड़ों पर ही सड़ रहे हैं. सेब काश्तकार बलबीर सिंह रावत का कहना है कि अब इस बार तो कुछ नहीं बचा. एक इलाके में पूरी सेब की बेल्ट मलबे में दब गई, तो जहां बागान सुरक्षित हैं. वहां सड़कें तबाह हो गई हैं.
21 अगस्त: जब यमुना को भी रोका मलबे नेस्यानाचट्टी, यमुनोत्री मार्ग पर स्थित एक शांत कस्बा, यमनोत्री धाम यात्रा का एक पड़ाव 21 अगस्त की रात बरसाती गदेरे में बादल फटा. गदेरे से आया करीब ढाई लाख घन मीटर मलबा यमुना नदी को जाम कर गया और यमुना पर झील बन गई. इस झील की जद में कई होटल और घर आ गए. यहां लोगों को भारी नुकसान हुआ. झील को पंचर किया गया, लेकिन अभी भी पूरी तरह झील को तोड़ा नहीं जा सका है. लोगेां के दिलों में डर घर कर गया है.
29 अगस्त: एक दिन, तीन ज़िले, आठ मौतेंरुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर, तीनों जिलों में एक ही दिन तबाही आई. रुद्रप्रयाग में 10 लोग बह गए, सिर्फ एक शव मिला, बाकी अब भी लापता हैं. 33 दुकानें और घर बर्बाद हो गए. चमोली में दो मौतें, बागेश्वर में पांच, जिनमें से दो के शव तक नहीं मिल सके. इसी दिन यूएसनगर में बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई तो देहरादून की बिंदाल नदी में डूबने से एक बच्चे की मौत हो गई.
तबाही सिर्फ लोगों की नहीं इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी भारी नुकसानआपदा प्रबंधन के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा. सभी विभागों की सड़कें मिलाकर करीब 24 सौ करोड़ के नुकसान को आंकलन किया गया है. अकेले PWD को 7 अरब का नुकसान हुआ है. दर्जनों सड़कें, मोटर पुल, पैदल पुल बह गए. बिजली, पानी और खेती सब कुछ अस्त-व्यस्त. अगस्त ने उत्तराखंड को घायल नहीं किया. कहीं-कहीं खत्म ही कर दिया. मलबा हटाने से लेकर पुनर्निर्माण तक लंबा समय लगेगा. लेकिन कुछ जख्म ऐसे हैं जो कभी नहीं भरेंगे.

Nandni sharma

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