देहरादून : दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे का पूरा प्रोजेक्ट ही अत्याधुनिक और शानदार है, लेकिन इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर अपनी विशेषताओं के कारण अलग पहचान रखता है। यह ऐसा गलियारा है जो वन्य जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए यात्रियों को भी अनोखा अनुभव देता है। इस कॉरिडोर में वन्य जीवों के निर्बाध आवागमन के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।
तीन जोन में बंटा है वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर
दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर बनाए गए इस एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर को भारतीय वन्य जीव संस्थान ने तीन जोन—गणेशपुर, मोहंड और आसारोडी (देहरादून) क्षेत्र—में विभाजित किया है। इसकी कुल लंबाई 12 किलोमीटर है।
वन भूमि से होकर निकली कॉरिडोर की राह
एक्सप्रेस-वे का अंतिम 20 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग और उत्तराखंड के राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने जंगलों से होकर गुजरता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-72ए के अंतर्गत गणेशपुर से देहरादून तक इस परियोजना में उत्तराखंड की 9.6224 हेक्टेयर वन भूमि तथा उत्तर प्रदेश की 47.7054 हेक्टेयर वन भूमि का हस्तांतरण किया गया। दोनों राज्यों में वर्ष 2019-20 में डीपीआर तैयार की गई थी। उत्तर प्रदेश को वन भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति 20 जुलाई 2021 को, जबकि उत्तराखंड को 27 अप्रैल 2022 को प्राप्त हुई।
खूबियां: एक नहीं, कई लाभ
1. सुरक्षित वन्यजीव आवागमन
कॉरिडोर बनने से वन्य जीवों का आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम हुआ है। दुर्घटनाओं में कमी आई है। निरीक्षण में हाथी, नीलगाय, सांभर, लैपर्ड, जंगली सुअर सहित अन्य वन्य जीवों द्वारा कॉरिडोर के सहज उपयोग की पुष्टि हुई है।
2. बिना मानव विस्थापन के निर्माण
पहली बार विस्तृत नदी व वन क्षेत्र में एलिवेटेड मार्ग बनाया गया, जिससे किसी भी प्रकार का मानव विस्थापन नहीं हुआ।
3. बेहतर जीन पूल की संभावना
वन्य जीवों के विचरण क्षेत्र के विस्तार से उत्तम गुणवत्ता के जीन पूल के विकास की संभावना बढ़ी है।
4. दुर्घटनाओं में कमी
पहले स्थानीय लोगों द्वारा बंदरों को भोजन खिलाने से दुर्घटना की आशंका रहती थी। अब इस समस्या में उल्लेखनीय कमी आई है।
5. प्रदूषण नियंत्रण
वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए ध्वनि और वायु प्रदूषण को न्यूनतम करने के उपाय किए गए हैं।
6. कार्बन उत्सर्जन में कमी
अगले 20 वर्षों में 2.44 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है, जो लगभग 65 लाख वृक्षों के बराबर है। साथ ही करीब 19 प्रतिशत ईंधन की बचत होगी। (स्रोत: सीएसआईआर-आईआईपी)
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