पिछले तीन वर्षों में ऋषिकेश में गंगा राफ्टिंग के दौरान कई दुर्घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
इन दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए अब पर्यटन विभाग के अधीन राफ्टिंग एवं साहसिक खेल अधिकारी जसपाल चौहान ने अधिक लंबे रूट पर राफ्ट संचालन में फेरों की संख्या अधिकतम तीन निर्धारित करने का निर्णय लिया है।
अब इसे लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। अगले सप्ताह से नई व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा।
यह होगी नई व्यवस्था
राफ्टिंग एवं साहसिक खेल अधिकारी जसपाल चौहान के अनुसार, ऋषिकेश में राफ्टिंग का सबसे लंबा रूट मरीन ड्राइव-खारास्रोत (24 किलोमीटर) है, जिसे पूरा करने में औसतन साढ़े 3 घंटे का समय लगता है।
जबकि, दूसरा लंबा रूट शिवपुरी-खारास्रोत (18 किलोमीटर) है, जिसमें करीब ढाई घंटे लगते हैं।
इन दो सर्वाधिक लंबे रूटों पर ही तीन फेरे का नियम लागू रहेगा। इनके अलावा ब्रह्मपुरी-खारास्रोत व अन्य छोटे रूटों पर अधिकतम चार फेरे लगाए जा सकेंगे।
वहीं, नई व्यवस्था के तहत राफ्टिंग एवं साहसिक खेल विभाग द्वारा मरीन ड्राइव, शिवपुरी, ब्रह्मपुरी में स्थित विभागीय राफ्टिंग केंद्र में प्रत्येक राफ्ट का रिकार्ड दर्ज किया जाएगा।
लंबे व अन्य रूटों पर अधिकतम फेरे पूरे होने के बाद राफ्ट को गंगा में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा।
विभाग द्वारा अगले सप्ताह से लागू हो रही यह व्यवस्था में शुरुआती समय में आफलाइन मोड पर संचालित होगी, लेकिन विभाग अब सभी केंद्रों में राफ्टों के फेरों की प्रभावी निगरानी व अनियमितताएं रोकने के लिए साफ्टवेयर प्रणाली विकसित करने में जुट गया है।
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