ऊधम सिंह नगरः उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के दिनेशपुर थाना क्षेत्र में आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है. गदरपुर की उप जिलाधिकारी (एसडीएम) ऋचा सिंह ने खुद को मरीज बनाकर जांच की, जिसके बाद यह पूरा मामला सामने आया. जानकारी के मुताबिक, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया को लंबे समय से एक कथित डॉक्टर के खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं. शिकायतों में आरोप था कि वह आयुर्वेदिक इलाज के नाम पर लोगों को गलत दवाएं देकर इलाज कर रहा है.
मरीज बनकर पहुंचीं SDMमामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने एसडीएम ऋचा सिंह को जांच के आदेश दिए. जांच के तहत एसडीएम ऋचा सिंह शुगर मरीज बनकर आरोपी के पास पहुंचीं और उससे दवा ली. जांच के दौरान खुलासा हुआ कि कथित डॉक्टर आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर एलोपैथिक शुगर की दवाओं को मिलाकर मरीजों को दे रहा था, जो सीधे तौर पर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ था.
पुलिस को क्या-क्या मिलाछापेमारी के दौरान टीम ने मौके से बारासिंघा के सींग, एक अवैध तमंचा और 2 जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं. फिलहाल आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
50 कुंतल माल बरामद कियाबीते सोमवार को पुलिस-प्रशासन, आयुर्वेदिक-यूनानी, औषधि एवं वन विभाग की ज्वाइंट टीम ने दिनेशपुर नगर पंचायत कार्यालय के पीछे वार्ड नंबर दो स्थित में एक घर में छापेमारी की. मौके पर नकली आयुर्वेदिक दवा तैयार की जा रही थी. इन नकली दवाइयों से दो कमरे भरे हुए थे. बताया जा रहा है कि करीब 50 कुंतल माल बरामद हुआ है. जबकि शुगर की एलोपैथिक दवा पीआईएलजीपीएम-एसआर-2 की सात पेटियां बरामद हुईं.
अंग्रेजी दवाइयों और हिरण के सींग को पीसकर बनाते थे नकली दवाएक पेटी में 40 बॉक्स, एक बॉक्स में 20 स्ट्रिप और हर स्ट्रिप में 12 टैबलेट पाए गए. कई बोरों में बंद खाली पैकेट बरामद हुए. आरोपी एलोपैथिक दवाइयां और हिरण के सींग को पीसकर कथित रूप से आयुर्वेदिक शुगर कंट्रोल चूर्ण तैयार करता था. टीम को मौके पर दवा मिलाने और पीसने वाली मशीनें मिली हैं. इनकी कीमत लाखों में बताई जा रही है. पकड़े गए आरोपित की पहचान स्वरूप सिंह के रूप में हुई है.
एक हजार रुपये तक बेची जाती थी दवावन क्षेत्राधिकारी रूप नारायण गौतम ने बताया कि बरामद हिरण के सींगों की जांच की जा रही है. इसकी तस्करी या शिकार के बारे में पूछताछ की जा रही है. दवा की एक पुड़िया एक हजार रुपये तक बेची जाती थी. सोशल मीडिया के जरिया प्रचार की बात भी सामने आई है. आरोपी अपने ठिकाने से भी सीधे दवा बेचता था. लोगों में एक-दूसरे को बताकर यानी कि वर्ड ऑऱफ माउथ से अपनी दवा की मार्केटिंग करता था.
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