हिन्दू साम्राज्य दिवस पर संघ कार्यालय में संगोष्ठी, हिन्दवी स्वराज और राष्ट्र जागरण का हुआ आह्वान –

 
देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त कार्यालय सभागार में हिन्दू साम्राज्य दिवस के पावन अवसर पर भव्य विचारगोष्ठी एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, स्वयंसेवक, विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं व्यावसायिक संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ कवि श्रीकांत श्री के ओजस्वी संचालन एवं प्रेरक काव्य पंक्तियों के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए राष्ट्र जीवन में ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
प्रारंभिक उद्बोधन में विजय जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छह उत्सवों की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ के उत्सव समाज को संगठित, संस्कारित एवं राष्ट्रनिष्ठ बनाने के सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू साम्राज्य दिवस भारतीय इतिहास के उस स्वर्णिम क्षण का स्मरण है, जब छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिन्दवी स्वराज की स्थापना कर पराधीनता, अन्याय और सांस्कृतिक आक्रमणों के विरुद्ध स्वाभिमान, धर्मरक्षा और राष्ट्र चेतना का शंखनाद किया।
मुख्य वक्ता विभाग प्रचारक धनंजय जी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक पराक्रमी योद्धा नहीं, बल्कि राष्ट्र पुरुष, कुशल प्रशासक, धर्मरक्षक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के महानायक थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन हिन्दू समाज के आत्मगौरव, स्वराज और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व के निर्माण में राजमाता जीजाबाई के राष्ट्रनिष्ठ संस्कारों तथा समर्थ गुरु रामदास के आध्यात्मिक मार्गदर्शन की निर्णायक भूमिका रही। बाल्यकाल से ही उनमें अन्याय के प्रति प्रतिकार, धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा तथा मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना विद्यमान थी। उन्होंने अफजल खान प्रसंग, मुगल एवं आदिलशाही की चुनौतियों तथा बाजी प्रभु देशपांडे के अप्रतिम बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि हिन्दवी स्वराज का इतिहास त्याग, तप, पराक्रम और संगठन शक्ति का अनुपम उदाहरण है।
धनंजय जी ने कहा कि आज भी शिवाजी महाराज का जीवन युवाओं के लिए साहस, चरित्र, नेतृत्व, सुशासन और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा है। उन्होंने आह्वान किया कि संगठित, समरस और संस्कारित समाज का निर्माण ही राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जाने का मार्ग है।
वक्ताओं ने कहा कि हिन्दू साम्राज्य दिवस केवल एक ऐतिहासिक उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना, सांस्कृतिक स्वाभिमान, सामाजिक समरसता और संगठन शक्ति के जागरण का पर्व है। वर्तमान समय में समाज के प्रत्येक वर्ग को राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम का समापन प्रथम हिन्दू सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज के हिन्दवी स्वराज के आदर्शों का अनुसरण करते हुए राष्ट्र के परम वैभव, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा संगठित एवं सशक्त हिन्दू समाज के निर्माण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
इस अवसर पर पद्मश्री आर.के. जैन (पूर्व अध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग), अधिवक्ता रितु गुजराल,  नौटियाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष मधु गुप्ता, हरजीत कौर, वरिष्ठ पत्रकार पंकूल शर्मा, डॉ. अभय, विवेक शर्मा, श्रीकांत शर्मा सहित अनेक प्रबुद्ध नागरिक, शिक्षाविद, उद्यमी, चिकित्सक एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
 

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