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उत्तराखंड में लैंड फ्रॉड पर सख्ती, 200 मामलों में तेज कार्रवाई, 40 निस्तारित – myuttarakhandnews.com

उत्तराखंड में भूमि धोखाधड़ी (लैंड फ्रॉड) के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज हो गई है. जिसके तहत गढ़वाल मंडल में एक अहम बैठक आयोजित की गई.
देहरादून स्थित गढ़वाल आयुक्त कार्यालय में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे ने की. बैठक में आईजी गढ़वाल, मंडल के सभी एसडीएम, तहसीलदार और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे. बैठक का मुख्य उद्देश्य भूमि धोखाधड़ी से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा कर उनके शीघ्र निस्तारण के लिए ठोस रणनीति बनाना था.
7 से 8 मामलों में एफआईआर दर्जआयुक्त विनय शंकर पांडे ने बताया कि वर्ष 2021 से अब तक गढ़वाल मंडल में भूमि धोखाधड़ी के कुल 200 मामले सामने आए हैं. इनमें से 40 मामलों का निस्तारण इस बैठक के दौरान कर दिया गया है, जो प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि शेष मामलों के निस्तारण के लिए भी समयबद्ध कार्य योजना तैयार की जा रही है.
उन्होंने आगे जानकारी दी कि कुछ मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना प्रस्तावित है. फिलहाल 7 से 8 मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है. वहीं, कई अन्य मामलों का निस्तारण एक से डेढ़ सप्ताह के भीतर किए जाने की संभावना है. इससे स्पष्ट है कि प्रशासन अब इन मामलों को लेकर गंभीरता से काम कर रहा है.
आगे की कार्रवाई में जुटी पुलिसआयुक्त ने बताया कि लैंड फ्रॉड के मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है. अब किसी भी भूमि धोखाधड़ी के मामले में सीधे मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा, बल्कि पहले लैंड फ्रॉड कमेटी की जांच और मंजूरी अनिवार्य होगी. इसके बाद ही पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मामले में अनावश्यक पुलिस हस्तक्षेप न हो और जांच प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे.
हर 15 दिन में आयोजित की जाएगी समीक्षा बैठकउन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि आम जनता को भूमि से जुड़े विवादों में त्वरित और न्यायपूर्ण समाधान मिले. इसके लिए हर 15 दिन में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि मामलों की प्रगति पर नजर रखी जा सके और लंबित प्रकरणों को जल्द से जल्द निपटाया जा सके. प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल लैंड फ्रॉड के मामलों में तेजी आएगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी. साथ ही, निर्दोष लोगों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से भी राहत मिलेगी.
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद गढ़वाल मंडल में भूमि धोखाधड़ी के मामलों पर प्रशासन ने सक्रियता बढ़ा दी है. नियमित समीक्षा और सख्त प्रक्रिया के जरिए सरकार इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रही है.

Nandni sharma

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