उत्तराखंड उच्च न्यायालय का कड़ा फैसला ! वनभुलपुरा मामले में जिले से बाहर होगा सिंघम नीरज भाकुनी का तबाबला – myuttarakhandnews.com

उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल) – सोशलमीडिया प्लेटफार्म पर विजिट करते समय हमारे आंखों के सामने अक्सर कुछ पुलिस कर्मियो की सिंघम स्टाईल में बनी रील आही जाती है ।ऐसे में देखा जाये तो अकेले नैनीताल जिले में कई वर्दी पहने सोशलमीडिया इन्फूलेंसर है जिनमे जिले के कई महिला पुरूष अधिकारी भी है ।जनता इनकी रील की दीवानी हो जाती है ऐसे में इनके ऊपर अधिक जिम्मेदारी बनती है परंतु क्या हकीकत में ये अधिकारी कार्य क्षेत्र में इतने कर्मठ है या नहीं ?इसका जबाब उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वनभुलपुरा हिंसा के दौरान वहाँ के SO रहे नीरज भाकुनी के मामले में दिया ।जहाँ उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नीरज भाकुनी को जिले से बाहर ट्रान्सफर करने के निर्देश दिये ।बता दे कि नीरज भाकुनी इंस्टाग्राम पर बहुत प्रसिद्ध है ।
18 जून 2025 हो हुई सुनवाई में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वनभूलपुरा हिंसा के दौरान गोली लगने से फईम की मौत की सी.बी.आई.जांच संबंधी याचिका में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम(एस.आई.टी.) से जांच कराने के निर्देश दिये है।
मुख्य न्यायधीश नरेंद्र और न्यायमूर्ती आलोक मेहरा की खण्डपीठ ने मामले की जाँच के दौरान जाँच अधिकारी नीरज भाकुनी का जिले से बाहर तबादला करने का आदेश दिया ।
मामले की मॉनिटरिंग स्वयं अदालत करेगी।
पूर्व में भी न्यायालय ने सख्त लहज़े में कहा कि जो अधिकारी उक्त मामले का जिम्मेदार है वह खुद इस मामले की जाँच कर रहा है और अंतिम रिपोर्ट भी खुद ही पेश कर रहा है।
अदालत ने हास्यस्पद अंदाज में कहा कि यह अपने आप में एक अनोखी जांच है ।
बताते चले कि 8 फरवरी 2024 को वनभूलपुरा हिंसा के दौरान फईम नाम के व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गयी।
उसके बाद परिजनों ने इसकी जांच कराने के लिए पुलिस और प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन पुलिस ने न तो इसकी जांच की और न ही मुकदमा दर्ज किया। उसके बाद मुकदमा दर्ज कराने के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नैनीताल की कोर्ट में वाद दायर किया गया।जिसके बाद भी पुलिस द्वारा ना कोई जांच की गयी ना ही कोई कार्यवाही की ।
मृतक के भाई परवेज ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा कि नैनीताल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को 6 मई 2024 को निर्देश दिए थे कि मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इसकी जांच करें और उसकी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करें।
लेकिन, आजतक पुलिस ने इसकी जांच ही नही की, इसलिए उन्होंने मामले की सी.बी.आई.से जांच कराने व परिवार को सुरक्षा दिलाने को लेकर याचिका दायर की।

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