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धराली और हर्षिल घाटी आपदा का सच आया सामने, वैज्ञानिकों ने बताई तबाही की असली वजह – Uttarakhand

इस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sandeep Chaudhary (see all)देहरादून: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में धराली और हर्षिल घाटी में 5 अगस्त को आई आपदा का असली सच सामने आ गया है। भू-वैज्ञानिकों और एसडीआरएफ की टीम ने निरीक्षण और ड्रोन फुटेज के आधार पर बताया कि श्रीकंठ पर्वत के ग्लेशियर का मलबा ही इस तबाही का असली कारण था। लगातार भारी बारिश और तीव्र ढलानों ने मलबे की गति को और घातक बना दिया, जिससे मलबा घाटी में उतरकर धराली और आसपास के इलाके में कहर ढा गया।यह खुलासा एसडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) की संयुक्त टीम द्वारा खीर गंगा उद्गम स्थल का निरीक्षण करने के बाद हुआ। टीम ने ड्रोन वीडियो और फोटोग्राफ वैज्ञानिक संस्थानों को भेजकर घटनास्थल का विवरण साझा किया।वैज्ञानिकों ने बताई आपदा की असली वजहभू-वैज्ञानिकों ने अब पुष्टि की है कि श्रीकंठ पर्वत पर ग्लेशियर में जमा भारी मलबा ही इस आपदा का कारण था। इसके पहले मौसम विभाग ने बादल फटने की संभावना को खारिज किया था, क्योंकि 5 अगस्त से पहले की सेटेलाइट तस्वीरों में पर्वत पर कोई झील नजर नहीं आई थी।इस घटना से इलाके में भारी नुकसान और स्थानीय लोगों के लिए खतरे की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और राहत कार्य जारी हैं।सात किलोमीटर ऊपर आपदा की शुरुआतएसडीआरएफ के आईजी अरुण मोहन जोशी ने धराली में आपदा के कारणों की पड़ताल को निम के साथ मिलकर ड्रोन से निगरानी शुरू की। निम व एसडीआरएफ की टीम टीम धराली से सात किलोमीटर ऊपर श्रीकंठ पर्वत के बेस तक पहुंची थी। टीम ने यहां के तीन वीडियो जारी किए। वहां टीम ने जो देखा, उसके अनुसार ग्लेशियर के तीन हिस्सों से हो रहे भारी जलप्रवाह से खीर गंगा का वेग विकराल हो गया था। इसी से धराली और हर्षिल तक आपदा आई।लगातार बारिश से मलबा हुआ था ढीलाभरसार विवि रानीचौरी परिसर के भू-वैज्ञानिक डॉ.एसपी सती के अनुसार, ग्लेशियर के मोरेन में जमा मलबा, लगातार बारिश से इतना ढीला हो गया कि ढाल पर एक साथ खिसकने लगा। खीर गंगा में पानी के साथ आया मलबा करीब 4800 मीटर ऊंचाई से आया था। यह श्रीकंठ पर्वत का बेस और पुराना ग्लेशियर क्षेत्र है।

Nandni sharma

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