तहसील मुख्यालय के दूरस्थ बल्याऊं गांव में मंगलवार की रात्रि एक प्राचीन शैली के बने मकान में आग लग गई। आग से घर के अंदर रखा सारा सामान जलकर खाक हो गया। आग लगने का कारण बिजली का शाट सर्किट होना बताया जा रहा है।
विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ेंबल्याऊं गांव निवासी भूपाल सिंह मेहरा व डिगर सिंह मेहरा ने अपना दो मंजिला पुश्तैनी मकान गांव के ही हयात सिंह मेहरा, पुत्र हिम्मत सिंह मेहरा को देखरेख के लिए दिया हुआ है। भूपाल व डिगर सिंह का परिवार वर्तमान में बाहर रहता है और हयात सिंह विगत 35 वर्षों से अपनी पत्नी हेमा देवी व पुत्री रेनू महरा के साथ उनके पुश्तैनी मकान में रह रहे थे। मंगलवार को दीपावली पर्व पर उनका परिवार प्रधानमंत्री आवास के तहत हाल ही में बने अपने नए मकान में दीये जलाने के लिए गया हुआ था। इसी बीच पुश्तैनी मकान में अचानक आग लग गई।
आसपास के लोगों को तब जानकारी लगी जब मकान आग की लपटों से पूरी तरह से घिर गया। मकान के अंदर लगे तख्ते-बल्लियों से आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। जानकारी मिलते ही आसपास के लोग आग बुझाने में जुट गए। करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस बीच केवल गोशाला में बंध जानवरों को ही बचाया जा सका। घर के अंदर रखा गया सारा सामान पूरी तरह से जलकर स्वाहा हो गया।
आगजनी घटना की जानकारी मिलने पर बुधवार को थल तहसील के राजस्व उपनिरीक्षक सुमन भंडारी, राजस्व उपनिरीक्षक विपिन कापड़ी, राजस्व उपनिरीक्षक दीपक पंचोली की टीम बल्याऊं गांव में पहुंची और क्षति का आकलन किया। टीम ने मकान सहित पीड़ित परिवार के 65 लाख का नुकसान होने का अनुमान लगाया है।
अगले माह बेटी की शादी, पांच तोला सोना व 10 तोला चांदी भी स्वाहापीड़ित हयात सिंह की बेटी की अगले माह नवंबर में शादी होनी है। हयात सिंह मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। बेटी की शादी के लिए उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई से पांच तोला सोना, दस तोला चांदी व अन्य सामग्री बनाई थी। अचानक मकान में लगने से समस्त जेवर जलकर खाक हो गया। साथ ही घर के अंदर रखे छह बोरी धान, सात बोरी गेहूं, टीवी, पंखा, चक्की, बिस्तर, बर्तन, पहनने की साड़ी, कपड़े, कृषि कपड़े सभी जलकर स्वाहा हो चुके हैं।
इस आगजनी ने पीड़ित परिवार को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। पीड़ित माता-पिता के सामने अब बेटी की शादी के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो चुकी है। अचानक हुई इस अनहोनी की घटना से पीड़ित परिवार गहरे सदमे और बदहवास स्थिति में हैं। सब अनाज और बर्तन के जल जाने से उनका परिवार मंगलवार शाम से भूखा-प्यासा भी है।
सड़क होती तो बच सकता था मकानथल: बल्याऊं गांव में अभी तक सड़क नहीं पहुंच सकी है। गांव की दूरी सड़क से करीब छह किमी है। बल्याऊं गांव के नाम से प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत पांखू-चौसाला-नौलड़ा सड़क बनी हुई है, लेकिन बल्याऊं गांव को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। सड़क के अभाव में क्षेत्र के ग्रामीणों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यदि गांव तक सड़क होती तो फायर ब्रिगेड की मदद से आग पर समय रहते काबू पाया जा सकता था।
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