देहरादून: उत्तराखंड में वर्ष 2015 में हरीश रावत सरकार में शुरू की गई एक महत्वकांक्षी योजना इंदिरा अम्मा भोजनालय दम तोड़ती नजर आ रही है। प्रदेशभर में 100 इंदिरा अम्मा भोजनालयों को खोलने के लक्ष्य के साथ शुरू की गई यह योजना 42 के नंबर पर अटक गई थी, लेकिन दुखद पहलू यह है कि इनमें से भी 19 बंद हो चुके हैं। सिस्टम की काहिली जहां लोगों को सस्ते पोष्टिक भोजन से दूर कर रही है, वहीं इन भोजनालयों से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की सैकड़ों महिलाएं भी एक-एक कर बेरोजगार हो रही हैं।
भोजनालय की शुरुआत अगस्त 2015 में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ता और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना था। इसके साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों को रोजगार देना था। सरकार या प्रशासन के स्तर से एक भी प्रयास ऐसा नजर नहीं आता, जिसमें बंद हुए भोजनालओं को पुन: शुरू कराने या नए भोजनालय खोलने के स्तर पर कोई नई कार्यवाही की गई हो।
सरकार की बेरुखी का शिकारबंद हुए 19 भोजनालयों में दो ऐसे भी थे, जो बिना अनुदान के संचालित हो रहे थे। जबकि अनुदान वाले भोजनालयों में सरकार 10 रुपये प्रति थाली सब्सिडी देती है।
क्या कहते हैं जिम्मेदारग्राम्य विकास विभाग के सचिव धीरज गब्रयाल का कहना है कि यह एक अच्छी योजना है। इसे बंद नहीं होने दिया जाएगा। जिलों से अपडेट मांगा गया है। बंद भोजनालयों को पुन: शुरू कराने के प्रयास किए जाएंगे। लोगों को सस्ता और पोष्टिक भोजन मिले, इसके लिए अलग से नए सिरे से प्रयास किए जाएंगे।
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