देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को उत्तराखंड के 27वें दौरे पर होंगे. यहां वह गणेशपुर हेलीपैड पर उतरकर सड़क मार्ग से देहरादून और सहारनपुर बॉर्डर पर बने मां डाट काली मंदिर के पहली बार दर्शन करेंगे. यहां वह माता की पूजा अर्चना भी करेंगे. मां डाट काली का यह मंदिर बहुत चमत्कारी है. यहां दर्शन करने के साथ ही मनोकामना को लेकर श्रद्धालु सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, विदेशों से भी आते हैं.
माना यह भी जाता है कि जब तक व्यक्ति माता के आगे शीश झुकाकर उनसे आशीर्वाद नहीं लेता है, तब तक वह देहरादून में एंट्री नहीं करता है. लोकल 18 से बातचीत कर श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा किए कि किस तरह माता ने उन्हें बुरे वक्त में बाहर निकाला है.
जानें मंदिर में आए श्रद्धालुओं ने क्या कहा?दिनेश सिंह ने कहा कि वह लोहाघाट चंपावत के रहने वाले हैं, जहां से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधायक है. उन्होंने कहा कि मां काली से मेरा आज से नहीं, बल्कि पुराने समय से नाता है, जब मैं बुरे वक्त से गुजर रहा था. उन्होंने कहा कि वह कई मंदिर दर्शन करने गए हैं. उन्होंने बताया कि साल 2023 में उन्हें कई सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, उनका रोड एक्सीडेंट हुआ और दुकान में आग लगने से लाखों का नुकसान हो गया.
उन्होंने बताया कि उनके दादाजी का देहांत हुआ और जानवरों का भी नुकसान हुआ. उनका बिजनेस पूरी तरह से डूब गया. दिनेश बताते हैं कि जीवन के संघर्षों से वह लड़ नहीं पा रहे थे और डिप्रेशन में जा रहे थे. फिर उन्होंने माता रानी से अपने लाखों के कर्ज से मुक्ति की प्रार्थना की थी और माता ने उनकी सुन ली. उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई और अब वह अपने परिवार के साथ खुश हैं. यह सिर्फ माता रानी की कृपा की वजह से हुआ है.
माता डाट काली ने भरी मां की सूनी गोददेहरादून की रहने वाली ज्योति ने बताया कि वह बचपन से मां डाट काली माता के मंदिर पूजा अर्चना के लिए अपने परिवार के साथ आ रही हैं. ज्योति ने बताया कि उनकी शादी हुई, तो उनके घर और आंगन सूने रहते थे और बीमारी के चलते उन्हें संतान का सुख नहीं मिला था. शादी के बाद भी जब उनकी गोद नहीं भरी, तो उन्होंने माता रानी से मन्नत की और 10 साल गुजर जाने के बाद उनके घर में किलकारियां गूंजी. उनकी बेटी 12 साल की हो चुकी है और माता ने उनकी गोद भर दी है.
ब्रिटिश काल में करवाया गया था मंदिर का निर्माण19वीं शताब्दी की शुरुआत में अंग्रेज उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने के लिए पहाड़ों को काटकर रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे थे. उस दौरान सहारनपुर और देहरादून के बीच स्थित शिवालिक की पहाड़ियों में सुरंग बनाना एक बड़ी चुनौती थी. जानकारी दी जाती है कि अंग्रेज इंजीनियरों ने कई बार कोशिश की, लेकिन हर बार सुरंग धंस जाती या कोई न कोई अनहोनी हो जाती थी. जब मशीनें और विज्ञान नाकाम होने लगे, तब अंग्रेज भी असहाय महसूस करने लगे.
अंग्रेज इंजीनियर की मां के सपने में मां काली ने स्वप्न में दर्शन दिए. माता ने आदेश दिया कि सुरंग के निर्माण से पहले उनके मंदिर की स्थापना की जाए. अंग्रेज अधिकारियों ने तब मंदिर निर्माण की अनुमति दे दी. इसके बाद यहां डाट काली माता मंदिर बनवाया गया और फिर टनल के बाद यह रास्ता बनाया गया. 14 अप्रैल को पीएम मोदी इस चमत्कारी मंदिर के दर्शन करेंगे.
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