गढरत्न नरेंद्र सिंह नेगी जी के नाम से कौन परचित नहीं होगा ,देश से बाहर विदेशों में भी नेगी जी के नाम की धूम है ।नेगी जी का जन्म 12 अगस्त 1949 को पौड़ी के छोटे से गाँव मे एक फ़ौजी परिवार में हुआ । 50 वर्षो के गीतों के सफर के साथ 75वर्षीय नरेंद्र सिंह नेगी जी की आवाज में आज भी वो ही मिठास और कानों को तृप्त करने वाला जादू मौजूद है।जहाँ उत्तराखंड आंदोलन के समय उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से जनता में एक अलख जागयी थी वो ही पीड़ा वो ही दर्द पुनः 23 साल बाद उन्होंने भू कानून और मूलनिवास संघर्ष को अपनी एक सहमति दे कर लाखों की भीड़ जोड़ दी थी ।कल उनके जन्मदिन के अवसर पर उत्तराखंड के जनमानस में खाशा उत्साह देखने को मिला ।इसी अवसर पर हरिद्वार रोड स्थित संस्कृति प्रेक्षागृह में उनकी गीत यात्रा के 50 वर्ष कार्यक्रम में उनकी रचनाओं पर ललित मोहन रयाल द्वारा लिखित पुस्तक “कल फिर जब सुबह होगी” का विमोचन किया। जिसमे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री स्वंम मौजूद रहे ।
मुख्यमंत्री ने पुस्तक के लेखक ललित मोहन रयाल के प्रयासों की सराहना करते हुए पुस्तक को भावी पीढ़ी के लिये संरक्षित करने वाला कार्य बताया।
इस अवसर पर उत्तराखंड का जागरूक जनमानस के साथ मुख्य सचिव राधा रतूडी, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो.सुरेखा डंगवाल, पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूडी, साहित्यकार नंद किशोर हटवाल व साहित्यकार एवं लोक संस्कृति से जुड़े लोग उपस्थित थे।कार्यक्रम में युवा गायकों ने नेगी जी के सामने उनके ही गीत गा कर उनको सम्मान दिया ।तो वहीं वक्ताओं ने नेगी जी के गीतों की महिमा व्यक्त की ।नेगी जी ने पुनः अपने मन की पीड़ा व्यक्त कर पलायन पर गीत गा कर ख़ुद को लोकगायक साबित किया ।
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