देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी विभाग अब अपनी योजनाओं के लिए आम लोगों से सीधे जमीन खरीद सकेंगे। इससे जहां आम लोगों को मुआवजा अधिक मिलेगा वहीं विभागों को जमीन जुटाना आसान हो जाएगा। कैबिनेट ने भूअधिग्रहण की लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए नई लैंड पर चेंज पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। अभी तक विभिन्न योजनाओं के लिए सरकार की ओर से भू अधिग्रहण किया जाता है। इसमें न केवल लंबा वक्त लगता है बल्कि उचित दाम न मिलने की वजह से कोर्ट केस भी बहुत ज्यादा होते हैं।
इस वजह से लंबे समय के लिए सरकारी योजनाएं लटक जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए राजस्व विभाग ने योजनाओं के लिए जमीन जुटाने को भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने का विकल्प तैयार किया है। जिसे कैबिनेट ने मंजूर कर दिया है। सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने बताया कि अब विभाग आपसी सहमति से सीधे आम लोगों से जमीन खरीदने के लिए समझौता करेंगे और आपसी सहमति से जमीन के रेट तय किए जाएंगे। मौजूदा पॉलिसी में जमीन का सर्किल रेट का चार गुना अधिक मुआवजा देने का प्रावधान है।
भूजल के कमर्शियल प्रयोग के लिए टैक्सउत्तराखंड में भूजल के व्यावसायिक प्रयोग के लिए अब शुल्क देना होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके साथ ही सात अन्य अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने बताया कि भूजल-प्राकृतिक स्रोतों के पानी के व्यावसायिक प्रयोग के लिए पंजीकरण करना होगा। इसके लिए शुल्क पांच हजार होगा। हर माह प्रयोग होने वाले पानी का भुगतान एक रुपये से लेकर 120 रुपये प्रति किलोलीटर की दर से करना होगा। प्रोसेस इंडस्ट्री, कूलिंग, वॉशिंग समेत अन्य उद्योगों को भूजल के दोहन पर एक रुपये से लेकर सात रुपये प्रति किलोलीटर की दर से शुल्क देना होगा। भूजल, प्राकृतिक स्रोतों के पानी का कोल्ड ड्रिंक्स, मिनरल वॉटर आदि में इस्तेमाल करने वाले उद्योगों को एक रुपये से लेकर 120 रुपये प्रति किलो लीटर की दर से भुगतान करना होगा। इसके अलावा पानी का अन्य तरीके से व्यावसायिक इस्तेमाल पर प्रति किलोलीटर एक रुपये से लेकर 20 रुपये का भुगतान करना होगा।
प्राग फार्म में सिडकुल की जमीन सबलेट हो सकेगीकैबिनेट ने यूएस नगर के प्राग फार्म में पट्टाधारकों को सिडकुल की जमीन सबलेट करने की इजाजत देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्राग फार्म में कुल 1354.14 एकड़ जमीन औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए सिडकुल को दी गई है। अभी तक व्यवस्था थी कि सिडकुल जिस पट्टेधारक को जमीन देगा उसे ही उद्योग स्थापित करना था। यदि तीन साल तक उद्योग की स्थापना नहीं हुई तो पट्टा स्वयं निरस्त हो जाता था। लेकिन अब पट्टेधारक को भी जमीन सबलेट करने का अधिकार मिल जाएगा। हालांकि जमीन पर उसी श्रेणी का उद्योग स्थापित करना अनिवार्य होगा जिसके लिए वह आवंटित की गई थी। पट्टे को सब लेट करने की प्रक्रिया उद्योग और राजस्व विभाग की सहमति के आधार पर किया जा सकेगा।
जीआरडी को मिलेगा विश्वविद्यालय का दर्जाकैबिनेट ने जीआरडी उत्तराखंड विवि के गठन को मंजूरी दे दी है। राज्य को उच्च शिक्षा का हब बनाने और शिक्षा में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सूचना महानिदेशक ने बताया कि नए विवि का नाम जीआरडी उत्तराखंड विवि होगा। यह विवि नए और रोजगारोन्मुख कोर्स शुरू करने के साथ ही युवाओं को भी रोजगार के अवसर प्रदान करेगा।
अन्य फैसलों पर भी नजरचिन्यालीसौड़, गौचर हवाई पट्टी को रक्षा मंत्रालय को देने की मंजूरी। उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026 को मंजूरी। यूएसनगर प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि सिडकुल को देने के लिए कैबिनेट के पुराने फैसले में संशोधन को मंजूरी। राजस्व की सहमति से पट्टे पर आवंटित भूमि को समान प्रयोजन के लिए सब लीज का अधिकार देने की मंजूरी। दून, चमोली, यूएसनगर, पिथौरागढ़ में जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं के संचालन को विभागीय ढांचें के पुनर्गठन को मंजूरी। जीआरडी उत्तराखंड विश्वविद्यालय को मंजूरी।
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